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ऑनलाइन होने के बाद भी तीन महीने तक पुराने सिस्टम से ही खरीदी जाएगी दवा

7 वर्ष पहले
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फाइल फोटो

लखनऊ. केंद्रीय औषधि भंडार और जिला अस्पतालों की तरफ से खरीदी जाने वाली दवाओं को स्वास्थ्य विभाग ने ऑनलाइन कर दिया है। लेकिन, एक अक्टूबर से लागू इस व्यवस्था के बावजूद अगले तीन महीने तक पुरानी व्यवस्था के तहत ही दवाओं की खरीदारी की जाएगी। विभागीय अधिकारियों का इसके पीछे तर्क है कि ड्रग इंवेंट्री एंड सप्लाई मैनेजमेंट के पूर्णतया संचालन के लिए नोडल अधिकारियों को प्रशिक्षित करना जरूरी है। पूरी प्रक्रिया के तीन महीने में पटरी पर आ जाने के बाद ही पुरानी व्यवस्था को समाप्त किया जाएगा।

एनआईसी के सहयोग से ड्रग इंवेंट्री एंड सप्‍लाई मैनेजमेंट सिस्टम के संचालन को लेकर तैयार किए गये ड्रग प्रिक्योरमेंट एंड इंवेंट्री कंट्रोल सिस्टम साफ्टवेयर को विभागीय वेबसाइट dghealth.up.nic.in पर अपलोड कर दि‍या गया है। साफ्टवेयर का संचालन डीजी हेल्थ के निर्देशन में कि‍या जाएगा। वहीं, केंद्रीय औषधि भंडार और डीजी हेल्थ की तरफ से इसके लि‍ए नोडल ऑफिसर की नियुक्ति की जाएगी। जबकि जिला स्‍तर पर एसीएमओ भंडार और जिला चिकित्सालय स्‍तर पर मुख्‍य फार्मासिस्ट स्टोर नोडल अधिकारी होंगे।


साफ्टवेयर के आंकडे माने जाएंगे वैध
साफ्टवेयर में उपलब्ध डाटा बेस के सत्यता की जिम्मेदारी चिकित्‍सा स्‍वास्‍थ्‍य महानिदेशक और निदेशक केंद्रीय औषधि भंडार की होगी। इसमें उपलब्ध आंकडे वैध माने जाएंगे। साफ्टवेयर के संचालन में आने वाली तकनीकी खामियों पर नजर और नए माड्यूल का निर्माण एनआइसी की तरफ से कि‍या जाएगा। इसके लि‍ए एनआइसी अपनी तरफ से तकनीकी निदेशक की नियुक्ति करेगा।


रजिस्‍ट्रेशन फार्म भरने के बाद ही मिलेगा यूजर आईडी व पासवर्ड

स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के केंद्रीय औषधि भंडार के निदेशक डॉ. योगेंद्र कुमार के मुताबिक साफ्टवेयर के संचालन हेतु दवा क्रय अधिकारी और दवा सप्लायर कंपनी को वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से यूजर रजिस्‍ट्रेशन फार्म भर कर एनआईसी को उपलब्ध कराएंगे। इसके आधार पर एनआईसी की तरफ से उन्‍हें यूजर आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया जाएगा। पूरी व्यवस्था के संचालन को लेकर पहले आवश्यक संसाधनों की उपलब्ध्ता यूपी हेल्थ सिस्टम स्ट्रेंथनिंग प्रोजेक्‍ट की तरफ से कराया जाएगा।

आगे पढ़िए यूपीएचएसएसपी द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी व्यवस्था...