लखनऊ. हमेशा की तरह इस बार भी यश भारती सम्मान विवादों में घिर गया है। इस बार दो साल के पुरस्कार एक साथ दिए गए, जिसमें 56 में से 15 लोग यादव हैं। सपा सरकार पर हमेशा से ही यादवों को तरजीह देने का आरोप लगता रहा है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। इसको लेकर विपक्षी दलों ने सपा सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाया है। बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर ने लिस्ट के नामों में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की बात कही। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता द्विजेंद्र त्रिपाठी ने सरकार पर यश भारती पुरस्कार को मजाक बनाने का आरोप लगाया है।
सोमवार को राम मनोहर लाहिया पार्क में सपा सरकार द्वारा यश भारती सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सीएम अखिलेश यादव के साथ सपा सुप्रिमो
मुलायम सिंह यादव भी मौजूद थे।
बताते चलें कि यश भारती पुरस्कार पाने वाले लोगों की लिस्ट पर नजर डाली जाए तो एक चौथाई से ज्यादा नाम यादव कुनबे के ही नजर आएंगे। हालांकि, सरकार ने राजन-साजन मिश्र, शुभा मुद्गल, कैलाश खेर, जिमी शेरगिल, रेखा भारद्वाज, रामानंदाचार्या, समीर समेत अन्य विभूतियों को भी यश भारती अवार्ड दिए गए। इसके बावजूद नामों में यादवों की भरमार ने विपक्षियों को हमला करने का मौका दे दिया है।
पारदर्शी हो चयन और सम्मान प्रक्रिया
बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर सिंह ने कहा कि प्रतिभागियों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन यह प्रक्रिया पारदर्शी होना चाहिए। यश भारती पुरस्कारों को लेकर सरकार पर जिस तरह के आरोप लग रहे हैं, उसके लिए सपा सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीजेपी हमेशा से विभूतियों को सम्मान देने की पक्षधर रही है, लेकिन पारदर्शी प्रकिया सुनिश्चित करना चाहिए।
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