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आजोने दि‍वस: वि‍शेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण पर दि‍या जोर

7 वर्ष पहले
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तस्‍वीर में: ओजोन दि‍वस के मौके पर आंचलिक विज्ञान नगरी में कार्यक्रम का उद्घाटन करते अधि‍कारी।
लखनऊ. ओजोन दि‍वस के मौके पर बुधवार को आंचलिक विज्ञान नगरी में एक कार्यक्रम का आयोजन कि‍या गया। इस दौरान उपस्‍थि‍त वि‍शेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर दि‍या। बायो-टेक पार्क, लखनऊ के कार्यकारी अधिकारी डॉ. पीके सेठ ने कहा कि‍ यदि‍ ओज़ोन परत को क्षरण होने से रोक दि‍या जाए तो मानव शिशुओं में विकलांगता, त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, अंधापन और प्रतिरोधक क्षमता में कमी अपने आप आ जाएगी। वहीं, फसलों की पैदावार में कमी जैसी कई समस्याएं भी खुद-ब-खुद दूर होने लगेगी। इसलि‍ए सभी लोगों को ओजोन की रक्षा करने का संकल्‍प लेना चाहि‍ए।
बताते चलें कि‍ डॉ. पीके सेठ विश्व ओजोन दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि‍ ओजोन परत के क्षरण के फलस्वरूप धरती पर सूर्य के प्रकाश से आने वाली पराबैगनी विकिरण की मात्रा में वृद्धि हो जाती है। इसके अलावा उन्होंने ओज़ोन परत के क्षरण लिए उत्तरदायी कई मानव निर्मित रसायनों को बताया।
क्‍यों मनाया जाता है ओजोन दि‍वस
आंचलिक विज्ञान नगरी के कार्यक्रम में बोलते हुए विषेश कार्याधिकारी डॉ. एए खान ने 16 सितंबर के दिन अंतरराष्‍ट्रीय ओज़ोन दिवस के मनाए जाने के कारण और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि‍ सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी विकिरण से पृथ्वी पर जीवन की रक्षा के लि‍ए ओजोन परत संरक्षण के लिए 16 सितंबर, 1987 को माण्ट्रियल प्रोटोकॉल लागू किया गया।
इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 1995 में इस दिवस को अंतरराष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस के रूप में मनाए जाने का निर्णय लिया गया था। तभी से सम्पूर्ण विश्व में इस दिवस को मनाया जा रहा है।
आगे पढ़ि‍ए ओजोन परत को बचाने के लि‍ए करें पौधारोपण…