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ति‍रंगे का प्रशस्ति‍गान लि‍खने वाले श्याम लाल गुप्त को भूले लोग / ति‍रंगे का प्रशस्ति‍गान लि‍खने वाले श्याम लाल गुप्त को भूले लोग

dainikbhaskar.com

Aug 15, 2015, 04:39 AM IST

श्‍यामलाल ने 15 अगस्‍त 1952 को अपनी आवाज में लालकिले पर अपना लिखा गीत भी गाया था।

श्रद्धांजलि सभा में श्‍यामलाल गुप्‍त की प्रतिमा पर माल्‍यार्पण करता एक व्‍यक्‍ति‍। श्रद्धांजलि सभा में श्‍यामलाल गुप्‍त की प्रतिमा पर माल्‍यार्पण करता एक व्‍यक्‍ति‍।
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लखनऊ. भारत आजादी की 68वीं सालगिरह मना रहा है। शहीदों की याद में लोग जगह-जगह कार्यक्रम आयोजि‍त कर रखे हैं, वहीं दूसरी ओर ति‍रंगे का प्रशस्‍ति‍गान 'विजयी विश्‍व तिरंगा प्‍यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा', लि‍खने वाले श्‍याम लाल गुप्‍त 'प्रसाद' को लोग भूल गए हैं। इसका उदाहरण बीते सोमवार को देखने को मि‍ला, जब उनकी पुण्यतिथि पर सिर्फ उनके पुत्र और नाती सहित चंद लोग ही इकट्ठा हुए। बता दें कि श्‍यामलाल ने 15 अगस्‍त 1952 को अपनी आवाज में लालकिले पर अपना लिखा गीत भी गाया था।
बताते चलें कि‍ शहर के इस स्वतंत्रता संग्रामी को याद करने के लिए न तो जिला प्रशासन के पास समय था और न ही कानपुर के विधायकों के पास। हालांकि, पार्षद की पुण्यतिथि मना रहे लोगों के मुताबिक, समय के साथ भले ही कानपुर के लोगों के दिलो-दिमाग से श्यामलाल गुप्त की यादें धूमिल होती जा रही हों, लेकिन उनके लिखे गीत लोगों को के दिल-ओ-दिमाग से कभी मिट नहीं सकते।
आजादी के लि‍ए आंदोलन में कई बार गए जेल
'विजयी विश्‍व तिरंगा प्‍यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा' मशहूर गीत के रचयि‍ता श्‍याम लाल गुप्‍त भारत माता की आजादी के लिए आंदोलन में कई बार जेल जा चुके हैं। वहीं, उन्‍हें 1969 में पद्मश्री के सम्मान से नवाजा गया और 1977 में इनके निधन के बाद भारत सरकार ने इनके छायाचित्र पर डाक टिकट जारी कि‍या।
फूलबाग के नरवल गांव में हुआ था जन्‍म
कानपुर के जनरलगंज इलाके में जीवन की अंतिम सांस लेने वाले श्यामलाल गुप्त का जन्म 9 सितंबर 1896 को फूलबाग स्‍थि‍त नरवल गांव में हुआ था। एक वैश्‍य खानदान में पि‍ता विश्वेश्वर प्रसाद गुप्त और माता कौश्‍ल्‍या देवी के घर जन्‍मे श्‍याम लाल गुप्‍त ने अपनी कवि‍ताओं से देशभक्‍ति‍ का दीप प्रज्‍ज्‍वलि‍त कि‍या। इसके बावजूद इनका नाम कुछ बड़े नामों के आगे खो गया है।
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़ि‍ए, भारत की कोकिला सरोजि‍नी नायडू ने दी थी, इनकी कवि‍ता को आवाज…

श्रद्धांजलि सभा में बैठे श्‍यामलाल गुप्‍त के नाती और पोते। श्रद्धांजलि सभा में बैठे श्‍यामलाल गुप्‍त के नाती और पोते।
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बताते चलें कि‍ आजादी के एक वर्ष बाद ललित चंद्र मेहता द्वारा निर्देशित हिंदी फीचर फिल्म में श्‍याम लाल गुप्‍त की इस कवि‍ता को एक गाने के रूप में गाया।  जि‍से यूपी की प्रथम राज्यपाल और भारत की कोकिला सरोजिनी नायडू ने अपनी आवाज देकर  फिल्म को हिट कराया था। फिल्म में पृथ्वीराज कपूर, पी जयराज, वनमाला, जगदीश सेठी और जमशेद जी  जैसे बड़े अभिनेताओं  के होते हुए भी फिल्म की अपार  सफलता का श्रेय श्‍याम लाल की लिखी कविता को ही मिला। 
 
कब लिखी ये रचना?
भारतवासियो में आजादी की लौ  जलाने वाले कानपुर के महान पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी से मिलने के बाद स्वतंत्रा आंदोलन में कूदे श्‍यामलाल गुप्‍त ने इस  कविता की रचना मार्च 1924  में की थी। उन्‍होंने इस कविता को  13 अप्रैल, 1924  को कानपुर  के फूलबाग में  महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू जैसे महान नेताओं की मौजूदगी में जलियावाला बाग  नरसंहार के विरोध में गाया गया था। उनकी इस रचना को खन्ना प्रेस ने प्रकाशित किया था और इसकी पांच हाजार से अधिक प्रतियां बिकी थीं।  
 
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श्रद्धांजलि सभा में श्‍यामलाल गुप्‍त की प्रतिमा पर माल्‍यार्पण करता एक व्‍यक्‍ति‍।श्रद्धांजलि सभा में श्‍यामलाल गुप्‍त की प्रतिमा पर माल्‍यार्पण करता एक व्‍यक्‍ति‍।
श्रद्धांजलि सभा में बैठे श्‍यामलाल गुप्‍त के नाती और पोते।श्रद्धांजलि सभा में बैठे श्‍यामलाल गुप्‍त के नाती और पोते।
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