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अब रफ्तार पकड़ेगा लखनऊ मेट्रो प्रोजेक्ट, पीआईबी से मिल गया क्लीयरेंस

दिल्ली से यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने फोन पर dainikbhaskar.com को बताया कि पीआईबी से मंजूरी मिलने के बाद अब आगे की प्रक्रिया में केंद्र सरकार कैबिनेट से इस प्रोजेक्ट को पास कराएगी।

Dainik Bhaskar

Aug 06, 2015, 01:09 PM IST
PIB give clearance lucknow metro project uttar pradesh news
लखनऊ. लखनऊ मेट्रो को लेकर आखिरी बाधा दूर हो गई है। गुरुवार को दिल्ली में हुई प्रोजेक्ट इंवेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) की मीटिंग के बाद लखनऊ मेट्रो प्रोजेक्ट को क्लीयरेंस दे दी गई है। दिल्ली से यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने फोन पर dainikbhaskar.com को बताया कि पीआईबी से मंजूरी मिलने के बाद अब आगे की प्रक्रिया में केंद्र सरकार कैबिनेट से इस प्रोजेक्ट को पास कराएगी। इसके बाद विदेशी एजेंसियों की फंडिंग आसान हो जाएगी। फिर प्रोजेक्ट में कोई बाधा नहीं आएगी। केंद्र सरकार लखनऊ मेट्रो को 1300 करोड़ रुपए देगी और यूपी सरकार 3900 करोड़ लखनऊ मेट्रो में खर्च करेगी। राज्य सरकार 3500 करोड़ रुपए का लोन भी ले सकेगी।
क्‍यों जरूरी है पीआईबी की मंजूरी
दरअसल, इस समय मेट्रो को पीआईबी की मंजूरी की इसलिए ज्यादा जरूरत है, क्योंकि मेट्रो के कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं, जिनकी फंडिग विदेशी एजेंसीज कर रही है। विदेशी एजेंसीज तभी इन टेंडर्स को हरी झंडी दिखाएंगी, जब पीआईबी की मंजूरी मेट्रो को मिल जाएगी। मेट्रो को करीब तीन हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की फंडिग एफएडी और ईआईबी कर रही है। हालांकि, अभी तक पीआईबी से मंजूरी नहीं मिल पाई है। पीआईबी से मंजूरी न मिलने की वजह से उसके कई काम अटके पड़े हैं। विदेशी फंडिग से करीब 3500 करोड़ रुपए मेट्रो को मिलने हैं।
पहला फेज है आलमबाग से चारबाग
लखनऊ मेट्रो का पहला फेज करीब साढ़े 60 किलोमीटर का है, जो आलमबाग से लेकर चारबाग तक है। पहले फेज में मेट्रो यही पर इसी रुट पर चलनी है, जिसमें पूरे रुट में करीब आठ स्टेशन बनाए गए हैं। स्टेशनों को बनाने का काम भी शुरू हो गया है। हालांकि, अभी भी जो प्राइवेट लैंड है उसमें पेंच फंसा हुआ है। इसमें तीन मामले ऐसे हैं, जो कोर्ट में चले गए हैं।
कहां फंसा है पेंच
वहीं, रेलवे ने मवैय्या क्रॉसिंग पर बनने वाले पुल पर पेंच फंसा दिया है। मेट्रो ने जो पहले इस पुल का ड्राइंग बनाया था, वो ड्राइंग रेलवे को पसंद नहीं आया है, जबकि रेलवे ने इसमें फेरबदल करने के लिए कहा है। अब मेट्रो फिर से इसकी डिजाइन करेगा। हालांकि, जिस तरह की डिजाइन करने को कहा है कि उस तरह की डिजाइन से यदि यहां पर पुल बनता है तो मेट्रो की रफ्तार में करीब 20 किलोमीटर की रफ्तार का अंतर आएगा। सामान्यत: मेट्रो की रफ्तार 65-70 किमी होती है, लेकिन यहां पर पुल बनने के बाद इसकी रफ्तार 45 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। इस पुल की लागत करीब 28 करोड़ रुपए आएगी।
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