लखनऊ. नोएडा के बर्खास्त इंजीनियर यादव सिंह को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में पीआईएल दाखिल की गई है। बुधवार को दायर इस पीआईएल में अरबपति यादव सिंह के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। कहा गया है कि यह जांच सीबीआई या रिटायर्ड जस्टिस से करवाई जाए।
याचिका में कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और वर्तमान सपा सरकार के संरक्षण में यादव ने अवैध तरीके से अकूत संपत्ति बनाई है। यादव के तार तमाम बड़े-बड़े नेताओं और नौकरशाहों से जुड़े रहे हैं। इन नेताओं के संरक्षण में वह फला फूला। कहा गया है कि इसी वजह से सरकार को यादव के खिलाफ कार्रवाई करने में वक्त लगा और आशंका है कि सरकार जानबूझ कर यादव के खिलाफ कदम उठाने में ऐसी खामियां छोड़ देगी, जिसके उसे कानूनी लड़ाई में फिर जीत मिल जाए। इस वजह से यादव के पूरे मामले की जांच निष्पक्ष एजेंसी से होनी चाहिए। इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है।
क्या है पूरा मामला
नोएडा डिवेलपमेंट अथॉरिटी के सस्पेंड हुए चीफ इंजिनियर यादव सिंह की काली कमाई का पता लगाने में पुलिस के पसीने छूट रहे हैं। भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड तोड़कर धनकुबेर बन बैठे सिंह ने अपनी 40 फर्जी कंपनियों को बेचकर जुटाई रकम कहां छिपाई है, यह पता लगाने में आयकर विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस समय वह फरार भी बताया जा रहा है।
नोएडा डिवेलपमेंट अथॉरिटी के पूर्व चीफ इंजिनियर यादव सिंह को एसपी और बीएसपी दोनों से शह मिलने का आरोप लगता रहा है। 27 नवंबर ही में नोएडा, गाजियाबाद में यादव सिंह के ठिकानों पर हुई छापेमारी में उनके घर से मिले हीरे और सोने के गहनों की कीमत 100 करोड़ रुपए तक आंकी गई थी।
फाइल फोटोः यादव सिंह।