लखनऊ. यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव के खिलाफ फर्जी पीआईएल दायर करने पर हाईकोर्ट ने एक रिटायर्ड कर्मचारी पर 25 हजार रुपए जुर्माना कर दिया। याचिकाकर्ता ने शिवपाल के यूपी स्टेट वेयर हाउसिंग के चेयरमैन पद पर नियुक्ति को चुनौती दी थी। इस मसले पर पहले भी याचिकाएंं खारिज हो गई हैं और कोर्ट ने शिवपाल के इस पद पर बतौर चेयरमैन नियुक्ति पर मुहर लगा दी है।
यह आदेश जस्टिस इम्तियाज मुर्तजा और जस्टिस एसएन शुक्ला की बेंच ने राजेंद्र प्रसाद की याचिका पर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताता है, लेकिन इसके समर्थन में कोई ऐसा काम नहीं किया है, जिससे उसे सामाजिक कार्यकर्ता माना जाए। याचिकाकर्ता ने बिना मामले को समझे पीआईएल दाखिल कर दी।
इसी बेंच ने सपा सरकार द्वारा सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में भेदभाव मसले पर, इसे रद्द करने वाली पीआईएल को भी मंगलवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पहले से ही तमाम रिट याचिकाएं दायर हैं, जो विचाराधीन हैं।
रेलवे के डिवीजन मैनेजर को पांच साल की कैद
सीबीआई की विशेष जज नीरजा सिंह ने मंगलवार को ईस्ट सेंट्रल रेलवे के डिवीजन मैनेजर को पांच साल की कैद की सजा और 20 हजार रुपए जुर्माना सुनाया है। मैनेजर पूर्णानंद झा को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। उसने मुगलसराय रेलवे के डीआरएम ऑफिस में काम करते वक्त बिल पास करने के लिए ठेकेदार से 20 हजार की रिश्वत मांगी थी। इसके बाद सीबीआई ने जाल बिछाकर 14 अगस्त 2012 को झा को रंगे हाथों धर दबोचा।
फोटोः यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव