तस्वीर में: सौ नंबर कॉल होने के बाद मौके पहुंची पुलिस की गाड़ी।
लखनऊ. बीते मंगलवार की रात कृष्णा नगर में एक शादी समारोह में हुई चोरी की सूचना सौ नंबर पर दी गई। अगले दिन सूचना देने वाले के पास फोन आया कि आपने जो सूचना दी थी क्या उस पर हुई कार्यवाही से आप संतुष्ट हैं। यह सिर्फ एक कॉलर से नहीं बल्कि कंट्रोल रूम में फोन करने वाले अस्सी फीसदी से ज्यादा कॉलर से पुलिस के रिस्पांस के बारे में फीडबैक लिया जाता है। इसका मकसद आपातकालीन सेवाओं को और भी सटीक बनाना है।
मॉडर्न कंट्रोल रूम के साथ पुलिस का मॉडर्न लुक भी दिखने लगा है। अब तक मामले को किसी तरह निपटाने के आरोप झेलने वाली पुलिस अब शिकायत करने वाले कॉलर से यह भी पूछती है कि क्या वह पुलिस के रिस्पांस से संतुष्ट हैं? यदि नहीं तो क्यों? वह यह भी पूछती है कि क्या उसकी समस्या का समाधान हुआ?
क्यों लिया जाता है फीडबैक
मॉडर्न पुलिस कंट्रोल रूम के एएसपी दुर्गेश कुमार ने बताया कि कॉलर से फीडबैक लेने से यह पता चलता है कि पुलिस की सेवाओं से लोग कितना संतुष्ट हैं। इससे रिस्पांस टाइम के बारे में फिर से पता चल जाता है कि पुलिस कितनी देर में उनकी मदद के लिए पहुंच सकी। आपातस्थिति में समय का सबसे ज्यादा महत्व होता है। इसलिए हम फीडबैक से पुलिस का रिस्पांस टाइम और यूटिलिटी चेक करते हैं।
क्या होता है जब निगेटिव होता है फीडबैक
मॉडर्न पुलिस कंट्रोल रूम के एएसपी दुर्गेश कुमार ने बताया कि निगेटिव फीडबैक मिलने के बाद पुलिस पार्टी की काउंसिलिंग करते हैं। साथ ही इसके पीछे के कारणों को जानने का प्रयास करते हैं। मामले का विश्लेषण करने के बाद अपने विशेषज्ञों के माध्यम से लोगों को बताते हैं कि किस तरह से मामले को निपटाया जाए। बार-बार किसी भी पार्टी द्वारा एक तरह के मामले सामने आएंगे तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
आगे पढ़िए पांच फीसदी लोग मिलते हैं असंतुष्ट...