लखनऊ. उद्योगों से लिया गया सैंपल फेल हुआ तो अब उद्योगों को चेतावनी नोटिस नहीं दी जाएगी बल्कि सीधे कार्रवाई होगी। उद्योगों के कचरे से मैली हो रही नदियों को बचाने के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह आदेश मंगलवार को जारी किया है। बोर्ड के सदस्य सचिव जे.एस. यादव ने सभी मंडलों के क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिया है।
यूपी में स्थापित अधिकांश प्रदूषणकारी उद्योग प्रदूषित प्रवाह को नियमित रूप से ट्रीटमेंट प्लांट में शोधित नहीं कर रहे हैं। उद्योग प्रदूषित प्रवाह को बिना ट्रीट किए नदी-नालों के माध्यम से बाहर बहा देते हैं। बारिश में यह कार्य और तेजी से होता है। नदियों में पानी की अधिकता से उद्योगों से बहाया गया गंदा पानी बहाव के कारण पता नहीं चल पाता है। इस स्थिति से निबटने के लिए बोर्ड के सचिव ने सभी मुख्य पर्यावरण अधिकारियों की हाल में बैठक भी बुलाई थी।
बैठक में ज्यादा प्रदुषण फैलाने वाले उद्योगों के प्रदूषित प्रवाह को रोकने के लिए किए गए उपायों पर चर्चा की गई। इसके बाद निर्णय लिया गया कि, सभी मुख्य पर्यावरण अधिकारी और क्षेत्रीय अधिकारी अति प्रदूषणकारी उद्योगों की सख्त निगरानी करें। सभी उद्योगों से सैंपल लेकर उनकी जांच कराएं और जांच में नमूने फेल होने पर चेतावनी न देकर संबंधित उद्योगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें।
बताते चलें, इससे पहले बोर्ड ने प्रदेश की किसी भी नदी को मैला न होने देने के लिए योजना लागू की थी। इसके तहत अब मध्यम और छोटे उद्योग सामूहिक रूप से ईटीपी (ईफ्ल्युएंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगाकर प्रदूषित प्रवाह को शोधित कर सकेंगे। ईटीपी लगाने में खर्च होने वाली धनराशि का 50 फीसदी हिस्सा केंद्र और 25 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी। शेष 25 प्रतिशत सभी उद्योगों को मिलकर वहन करना होगा। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश जारी किया है।
प्रतीकात्मक तस्वीर।