प्रतीकात्मक तस्वीर।
लखनऊ. नरेंद्र मोदी ने पीएम बनने के बाद क्लीन इंडिया का नारा दिया था। उन्होंने साल 2019 तक देश को साफ और स्वच्छ बनाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है। मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में सरकारी स्कूलों के टॉयलेट बदहाल हैं। वाराणसी में कुल 1400 सरकारी स्कूल हैं। इनमें से 319 स्कूलों के टॉयलेट खराब पड़े हैं। वहीं, 37 सरकारी स्कूलों में तो टॉयलेट है ही नहीं। पीएम के संसदीय क्षेत्र ऐसा होने से क्लीन इंडिया के विजन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
डिस्ट्रिक्ट इनफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन के 2013-14 के आंकडों के मुताबिक, वाराणसी में कुल 1400 स्कूल हैं। इनमें से 19 गर्ल्स स्कूल ऐसे हैं, जहां अभी शौचालय नहीं बना है। 12 ब्वॉयज स्कूलों की भी कमोवेश यही स्थिति है। इनके अलावा 133 ऐसे गर्ल्स स्कूल भी हैं, जहां पर शौचालय खराब पड़े हैं। यही नहीं, 186 ब्वॉयज स्कूलों में भी शौचालय नहीं बने हैं। ऐसे में छात्र-छात्राओं को टॉयलेट के लिए बीच में क्लास छोड़कर जाना पड़ता है।
ब्लॉकवार शौचालयों की स्थिति
वाराणसी के ब्लॉकवार स्कूलों पर नजर डालें, तो आरजी लाइंस स्थित 191 स्कूलों में 19 गर्ल्स स्कूल और 22 ब्वॉयज स्कूल के टॉयलेट बदहाल हैं। बडागांव स्थित 150 स्कूलों में से दो स्कूल शौचालय विहीन हैं। वहीं, 25 गर्ल्स स्कूल और 29 ब्वॉयज स्कूलों के शौचालय खराब हो चुके हैं। चिरईगांव स्थित कुल 158 स्कूलों में से कई स्कूलों में शौचालय है ही नहीं।
चोलापुर ब्लॉक के कुल 155 स्कूलों में से 11 गर्ल्स और 27 ब्वॉयज स्कूलों में शौचालय खराब हो चुके हैं। हरहुआ ब्लॉक में कुल 149 स्कूलों में से 13 गर्ल्स स्कूलों में शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। काशी विद़यापीठ ब्लॉक के तहत कुल 125 स्कूलों में से 4 लड़कियों के और 9 लड़कों के स्कूल में शौचालय खराब अवस्था में हैं। वहीं, नगर निगम के तहत आने वाले कुल 120 स्कूलों में से 28 स्कूल शौचालय विहीन हैं।
नगर पालिका रामनगर में स्थित 16 स्कूलों में से 3 स्कूलों में शौचालय काम नहीं कर रहे हैं। पिंडरा ब्लॉक में आने वाले कुल 186 स्कूलों में से कई स्कूलों में टॉयलेट नहीं है। सेवापुरी ब्लॉक के तहत आने वाले कुल 150 स्कूलों में से 11 स्कूलों में शौचालय खराब अवस्था में पड़े हैं।
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