लखनऊ. बिजली संकट से निपटने में नाकाम पावर कार्पोरेशन की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। स्थायी नौकरी और निजीकरण न करने की मांग को लेकर मंगलवार से पूरे प्रदेश के संविदा कर्मी आंदोलन करने जा रहे हैं। इसी बीच गुरुवार से प्रदेश के करीब पांच हजार से ज्यादा अभियंता आंदोलन करने जा रहे हैं। वे एक सप्ताह तक क्रमिक अनशन करेंगे। इसके बाद दो अक्टूबर गांधी जयंती को वे सभी कार्य बहिष्कार करेंगे।
पावर कार्पोरेशन और सहायक अभियंता संघ के बीच 23 अगस्त को कई बिंदुओं पर समझौते हुआ था। इनमें वेतन विसंगतियां दूर कर अभियंताओं को लाभ पहुंचाने के साथ-साथ जेई प्रमोशन कोटा में भी बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया गया था। इसके अलावा उत्पादन निगम में भी विसंगती को लेकर कार्पोरेशन और जूनियर इंजीनियरों के बीच समझौता हुआ था। इस दौरान इंजीनियरों ने कार्पोरेशन को महीने भर में समझौते से जुड़े आदेश जारी करने का अल्टीमेटम भी दिया था। लेकिन, मियाद पूरी होने के बाद भी आदेश जारी नहीं हुआ। इससे नाराज अभियंताओं ने आंदोलन शुरू करने की घोषणा कर दी है।
एक अक्टूबर तक करेंगे क्रमिक अनशन
संघ के महामंत्री जीबी पटेल ने बताया कि एक अक्टूबर तक प्रदेश के सभी 19 क्षेत्रों, पांचों उत्पादन परियोजनाओं और जल विद्युत परियोजनाओं के मुख्यालय पर क्रमिक अनशन किया जाएगा। इस दौरान भी आदेश नहीं लागू हुए तो समूचे प्रदेश के जेई कार्य बहिष्कार कर भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। वहीं, प्रदेश भर के जेई इस अनशन में शामिल हो गए तो पावर कार्पोरेशन के लिए उत्पादन से लेकर ट्रांसमिशन और सप्लाई में भारी मुश्किल हो सकती है। पटेल ने बताया कि इसके अलावा निजीकरण के खिलाफ भी कार्पोरेशन को इस मियाद में निर्णय लेकर आदेश जारी करना होगा।
वहीं, मंगलवार से आंदोलनरत संविदा कर्मियों का अनशन शक्ति भवन गेट पर दूसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि जबतक उनकी मांगो को कारपोरेशन लिखित में नहीं मान लेता तब तक धरना जारी रहेगा।
प्रतीकात्मक तस्वीर