लखनऊ. गाजियाबाद, मेरठ और वाराणसी में बिजली के निजीकरण को लेकर तमाम बिजली कर्मचारी एक़जुट हो गए हैं। वे निजीकरण के सख्त खिलाफ हैं। बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने इसके खिलाफ आंदोलन करने का फैसला लिया है। तय किया गया है कि निजीकरण के लिए सूचना इकट्ठा कर रहे मेसर्स मेकान लिमिटेड के लोगों को किसी बिजली उपकेन्द्र या कार्यालय में घुसने नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही बिजली कर्मचारी आगामी 22 सितंबर को विरोध दिवस के रूप में हड़ताल पर रहेंगे।
बताते चलें कि शनिवार को बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की मीटिंग हुई। इसमें पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण के विरोध में पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन को एक चिट्ठी लिखी गई है। इसमें लिखा गया है कि निजीकरण की प्रक्रिया शुरू करके पावर कॉर्पोरेशन ने समिति को दिए गए लिखित आश्वासन का उल्लंघन किया है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने चिट्ठी में लिखा है कि गाजियाबाद और मेरठ जैसे शहरों के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है, जबकि इन शहरों का लाइन लॉस 15 फीसदी से कम है। वहीं, पावर कॉर्पोरेशन की लाइन हानियां 27 फीसदी है। इससे साफ है कि घाटे के नाम पर मुनाफा कमा रहे शहरों का निजीकरण किया जा रहा है। इससे पावर कॉर्पोरेशन का घाटा और बढ़ेगा। आगामी 22 सितंबर को इस फैसले के खिलाफ सभी कर्मचारी लामबंद होंगे।
प्रतीकात्मक तस्वीर।