लखनऊ. गाजियाबाद, मेरठ और वाराणसी में चल रही निजीकरण की प्रक्रिया के विरोध में ऊर्जा निगमों के बिजली कर्मचारी सोमवार को राज्य व्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे। शक्ति भवन, मध्यांचल और लेसा सहित सभी ऑफिस और बिजली उपकेंद्रों के कर्मचारी और अभियंता शक्ति भवन पर धरना देंगे।
प्रदर्शन कर रही संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर संघर्ष समिति को 28 मई 2003 और 11 फरवरी 2014 को दिए गए लिखित आश्वासन का राज्य सरकार ने उल्लंघन किया है। इस मामले में अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है, जबकि पावर कॉरपोरेशन ने मेमर्स मेकान लिमिटेड को सौंपे पत्र में लिखा है कि पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के जरिए इन शहरों की बिजली वितरण व्यवस्था के सुधार पर अपनी रिपोर्ट दें। यह साफ तौर पर निजीकरण की प्रक्रिया है, जिसे कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पदाधिकारी शैलेंद्र दुबे, डीसी दीक्षित, गिरीश पांडेय, प्रमोद कुमार दीक्षित का कहना है कि गाजियाबाद और मेरठ जैसे शहरों के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है, जबकि इन शहरों की लाइन लॉस 15 फीसदी से कम है। पावर कॉरपोरेशन की सकल लाइन लॉस 27 फीसदी है। इससे स्पष्ट है कि घाटे के नाम पर मुनाफा कमा रहे शहरों का निजीकरण किया जा रहा है, जिससे पावर कॉरपोरेशन का घाटा और बढ़ेगा। इसे टैरिफ बढ़ाकर आम जनता से वसूला जाएगा। पावर कारपोरेशन इस कार्य हेतु मेसर्स मेकान को चार करोड़ रुपए से ज्यादा दे रहा है। इसे भी आम जनता से ही वसूला जाएगा।
प्रतीकात्मक फोटो