लखनऊ. प्रदेश में बिजली संकट से निपटने की जद्दोजहद में जुटी राज्य सरकार ने बिजली के 69 नए उपकेंद्र बनाने का फैसला किया है। इन सभी उपकेंद्रों का निर्माण मार्च 2015 तक किया जाएगा। यह जानकारी शनिवार को राज्य के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने दी। साथ ही पर्याप्त मात्रा में बिजली उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण के जरूरी काम निर्धारित समय में पूरा कर लेने का निर्देश दिया गया है। यदि काम समय पर पूरे नहीं हुए तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य सचिव ने शनिवार को शास्त्री भवन में बिजली विभाग के आला अधिकारियों के साथ बैठक में राज्य के बिजली की हालात का जायजा लिया। राज्य सरकार की योजना है कि 2016 तक जिला मुख्यालय, महानगर और उद्योगों को 24 घंटे बिजली मिले। इसी तरह ग्रामीण, तहसील और शहरों को न्यूनतम 16, 18 और 22 घंटे बिजली आपूर्ति करने का लक्ष्य है। इसके लिए बिजली विभाग के अधिकारियों को उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण की कार्य योजना के तहत निर्धारित समय में आवश्यक काम पूरा कर लेने का निर्देश दिए गए हैं।
2016-17 में करीब 23 हजार 89 मेगावाट बिजली की जरूरत होगी
आलोक रंजन ने अनुसार, 2016-17 में करीब 23 हजार 89 मेगावाट बिजली की जरूरत होगी। इसके लिए नौ हजार 30 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की जरूरत होगी। मुख्य सचिव के मुताबिक, मौजूदा वित्तीय वर्ष में 20 बिजली उपकेंद्रों का निर्माण किया गया है। मार्च 2015 तक 69 नए बिजली उपकेंद्र बनाए जाएंगे।
मुख्य सचिव ने कहा कि ट्रांसमिशन विंग (स्कंद) में 765 केवी का एक उपकेंद्र, 400 केवी के चार उपकेंद्र, 220 केवी के आठ उपकेंद्र, 132 केवी के 16 उपकेंद्र और उससे जुड़ी लाइनों का निर्माण अक्टूबर, 2016 तक किसी भी हालात में पूरा कर लेने का निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।
आगे पढ़िए वर्तमान में स्थापित 1233 उपकेंद्रों में 4646 एमवीए की क्षमता में वृद्धि की जाएगी…