फोटो: विकलांग पर्वतारोही अरूणिमा सिन्हा की किताब का विमोचन करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
लखनऊ. ट्रेन हादसे मे अपना एक पैर खो देने के बावजूद जिंदगी से उम्मीद नहीं हारी। चुनौतियों का मुंहतोड़ जवाब देकर एवरेस्ट जैसे पहाड़ को भी बौना कर दिया। जहां लोगों के लिए एवरेस्ट पर चढ़ाई करना ही बड़ी बात है। वहीं, एक पैर से विकलांग होने के बावजूद उसे फतह करना और इस दौरान जिंदगी की कठिनाइयों को झेलते हुए मुकाम हासिल करना बड़ी बात है। इसी जज्बे को सलाम करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने पीएमओ ऑफिस में विकलांग पर्वतारोही अरूणिमा सिन्हा की जीवनी पर लिखी किताब का विमोचन किया। पीएम ने कहा कि इस किताब को पढ़ने से आज के युवाओं को प्रेरणा मिलेगी।
शुक्रवार को लखनऊ की दिलेर और जाबांज बेटी अरूणिमा सिन्हा के ऊपर लिखी किताब का विमोचन पीएम नरेंद्र मोदी ने किया। अरूणिमा ने बताया कि यह उनके लिए सबसे खुशी का पल है। एक वह दिन था जब वह मौत के मुंह से वापस आई थीं और आज यह दिन है, जहां देश के पीएम उनकी किताब का विमोचन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए वह काफी समय पहले से लगी थीं और किताब को पीएमओ में देकर आईं। पीएम मोदी ने मुलाकात के दौरान खुद बताया कि उन्होंने किताब को पढ़ा है और इसके लिए काफी सराहना भी की।
अरूणिमा ने किताब के बारे में बताया कि इसमें उन्होंने ट्रेन हादसा में पैर गवांने से लेकर परिवार का सपोर्ट और एवरेस्ट पर चढ़ाई तक के बारे में बताया है। उन परिस्थियों और उनका कैसे सामना किया। यह एक लाइव स्टोरी है जो लोगों को किसी भी परेशानी से लड़ने की हिम्मत देगी। उन्हें प्रेरणा देगी कि जीवन में कैसी भी समस्यां आए उसका सामना करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि आगे भी उनकी कुछ और किताबे प्रकाशित होंगी। इसमें उनके आगे के सफर के बारे में लिखा होगा।
एकेडमी पर दिया आश्वासन
अरूणिमा ने बताया कि उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान अंतर्राष्ट्रीय अकादमी के बारे में बताया। जहां सभी के साथ विकलांग लोग भी हर तरह के खेल सीख सीखें। इसपर उन्होंने आश्वासन दिया कि उनसे जो भी सहायता की जा सकेगी वह दी जाएगी। वहीं, खेल मंत्री से भी इसपर बात हुई और उन्होंने आश्वासन दिया कि वह इसपर विचार करेंगे और देखेंगे कि वहां कैसी सहूलियत और मदद दी जा सकती है।
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