फाइल फोटो: जिला करागार फैजाबाद।
लखनऊ. यूपी पुलिस को अब आम अपराधों के साथ-साथ एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पूरे यूपी में बड़े पैमाने पर संगठित गिरोह जरायम को अंजाम दे रहे हैं। खास बात यह है कि गैंग्स के मेंबर्स अब गिरफ्तारी के बाद भी जेल से अपने जरायम को अंजाम दे रहे हैं। हाल ही में यूपी की जेलों में पड़े छापे इस बात की तस्दीक करते हैं। शूटरों के गैंग देश के कोने-कोने में बैठे बड़े माफिया गिरोहों के लिए सुपारी लेकर हत्या और लूट जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। कुछ मामलों में इनके तार विदेशों से भी जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।
यूपी में चाहे वह बाराबंकी की जेल हो या गोरखपुर की, इनमे बंद रसूखदार माफियाओं का राज चलता है। आगरा जेल में बंद मुख्तार अंसारी हों या सुभाष ठाकुर, सुल्तानपुर जेल में बंद मुन्ना बजरंगी, वाराणसी सेंट्रल जेल में बंद बृजेश सिंह, सभी का धंधा पहले की ही तरह आसानी से अंजाम दिया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों की मानें तो ये अपराधी एक जेल से दूसरे जेल फोन कर उस जिले के स्थानीय अपराधियों के नेटवर्क के जरिए अपने धंधे को अंजाम देते हैं।
बाराबंकी जेल से चल रहा है चंदन का राज
बीते दो दिसंबर को गोरखपुर जेल में छापेमारी के बाद यह बात सामने आई थी कि पूर्वांचल का शातिर बदमाश चंदन सिंह बाराबंकी जेल से ही
मोबाइल द्वारा गोरखपुर जेल में बंद कुछ शातिर बदमाशों से बात करता था। हालांकि, वह अभी भी बाराबंकी जेल में बंद है। इस छापेमारी के बाद आपराधिक वारदातों की योजना बनाए जाने की जानकारी भी मिली थी। गोरखपुर के दर्जनभर डॉक्टरों और व्यापारियों को फोन कर लाखों की रंगदारी मांगी जा रही है।
बाराबंकी जेल में संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा, पन्ना लाल यादव उर्फ डॉक्टर और देवकी नंदन उर्फ चंदन सिंह जैसे कुख्यात अपराधी बंद हैं। यही नहीं, कई और बड़े, सफेदपोश अपराधी भी बाराबंकी जिला जेल में बंद हैं। इसके बाद भी जरायम की दुनिया में इनकी आज भी तूती बोल रही है। इसका कारण सिर्फ और सिर्फ केवल जेलों में मौजूद मोबाइल है। जेल की सलाखों के पीछे से सरगना अपने गिरोह का संचालन कर रहे हैं। इसी साल 15 जनवरी को कोतवाली क्षेत्र के बंकी में हुई सपा नेता अरविंद यादव की सनसनीखेज हत्या की वारदात के बाद जेल में बंद अपराधियों के बाहर चल रहे नेटवर्क का खुलासा हुआ था।
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