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लखनऊ. आए दिन कोयले की कमी के नाम पर उत्पादन बंद करने वाली रिलायंस और बजाज पावर प्लांट को यूपी पावर कॉरपोरेशन ने अब खुले बाज़ार से कोयला खरीदने (आयात) की छूट देने की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही उपभोक्ताओं से लेकर कर्मचारी यूनियनों ने कॉरपोरेशन के इस निर्णय का विरोध शुरू कर दिया है। सभी का दावा है कि इस फैसले से बिजली के दाम 50-60 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ सकते हैं।
खुले बाजार से कोयला खरीदने की इजाजत देने के फैसले के बाद ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन और यूपी राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ने कॉरपोरेशन के इस फैसले पर सवाल खड़ा कर दिया है। यूनियनों का कहना है कि इससे इन बिजली घरों से मिलने वाली बिजली की दरों में 50-60 पैसे प्रति यूनिट तक वृद्धि हो जाएगी। उन्होंने बताया कि पावर कॉरपोरेशन रोजा से 6.06 रुपए प्रति यूनिट और बजाज से 7.75 रुपए प्रति यूनिट की दर पर बिजली ले रहा है। जिस पर बिजली नियामक आयोग की आपत्ति का जवाब पावर कॉरपोरेशन अभी तक नहीं दे पाया है।
अब कोयला आयात के नाम पर इन बिजली घरों से पावर कॉरपोरेशन को और मंहगी बिजली खरीदनी पड़ेगी। बताते चलें कि रोजा और बजाज के बिजली घर मोमेरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) के जरिए बनाए गए हैं। इसमें बिजली खरीद की दरें बिजली घर लगने के बाद तय होती हैं। एमओयू के अनुसार, पावर कॉरपोरेशन मनमाने तरीके से तय दरों पर 25 साल तक बिजली खरीदने को विवश है।
सीएजी पहले ही जता चुका है आपत्ति
रोजा और बजाज के साथ किए गए एमओयू और बिजली क्रय करार पर सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई है। रिपोर्ट में आठ हजार करोड़ रुपए से अधिक की क्षति होने का अनुमान लगाया है। अभियंता संघ के डीसी दीक्षित ने कहा कि सीएजी की आपत्तियों पर समुचित कार्यवाही किए बिना रोजा और बजाज को कोयले के नाम पर मनमानी लूट की इजाजत देने का क्या औचित्य है?
उन्होंने बताया कि रोजा प्रथम चरण के लिए 27 लाख टन प्रति वर्ष और रोजा द्वितीय चरण के लिए 22 लाख टन प्रति वर्ष कोयला चाहिए। इसका अनुबंध सीसीएल (सेंट्रल कोल फील्ड लिमिटेड) के साथ है। अब 5.5 लाख टन कोयला आयात करने की अनुमति देने का अर्थ है कि कुल जरूरत का लगभग 11.25 फीसदी कोयला आयात करने की छूट होगी।
आगे पढ़िए किस प्रकार बढ़ेगी बिजली की दरें…