प्रतीकात्मक तस्वीर।
लखनऊ. लोकसभा चुनाव के दौरान यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने समाजवादी पेंशन योजना की शुरुआत की थी। उम्मीद था कि इस योजना का फायदा जरूरतमंदों को मिलेगा। अब इस योजना की कमान उन अधिकारियों के हाथों में है, जिन्होंने समाज कल्याण विभाग में बड़े-बड़े खेल किए हैं। ऐसे में अब इस योजना के सही तरीके से चलने पर सवाल खड़े हो गए हैं। भ्रष्ट अधिकारियों को इस योजना की जिम्मेदारी दिए जाने से इसका भविष्य भी लटका नजर आ रहा है।
समाजवादी पेंशन योजना को संचालित करने का जिम्मा समाज कल्याण विभाग के ऊपर है। इस विभाग पर पहले ही छात्रवृत्ति घोटाले और शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाले के दाग लग चुके हैं। इन घोटालों में जिन अधिकारियों का नाम आया था, उन्हें समाजवादी पेंशन योजना को चलाने की जिम्मेदारी मिली है। इनमें से कई अधिकारियों को चार्जशीट तक दी जा चुकी है। ऐसे में इस योजना के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।
निदेशालय में भी तैनात हैं दागी अफसर
समाज कल्याण विभाग के निदेशालय में भी दागी अफसर तैनात हैं। इनके ऊपर लगे आरोपों को दरकिनार कर इन्हें प्रमोशन भी दिया जा चुका है। इनमें उपनिदेशक मुख्यालय के पद पर तैनात पीसी उपाध्याय भी शामिल हैं। इनपर कानपुर नगर में समाज कल्याण अधिकारी के पद पर रहते हुए घोटाला करने का आरोप हैं। इन्होंने दशमोत्तर शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत कई करोड़ रुपए का घोटाला किया था।
निलंबन के बजाय मिला प्रमोशन
मामले की विभागीय जांच भी हुई। हालांकि, इन्हें निलंबित नहीं किया गया। पूरी घटना की जांच दबा दी गई। जुलाई 2013 में उनका प्रमोशन भी हो गया। इतना ही नहीं, तत्कालीन निदेशक हरिलाल पासी ने 30 सितंबर को अपने रिटायरमेंट के 15 दिन पहले पीसी उपाध्याय को निदेशालय में शिक्षा, स्थापना और नजारत जैसे महत्वपूर्ण अनुभागों का प्रभार देकर उन्हें भ्रष्टाचार का इनाम भी दिया।
किन-किन जिलों में हैं दागी
सूत्रों के मुताबिक, दर्जन भर जिलों में तैनात समाज कल्याण अधिकारियों पर भी घोटाले के आरोप हैं। यह सब छात्रवृत्ति घोटाले में शामिल रहे हैं। 2012-13 और 2013-14 में मेरठ, आगरा, कानपुर, मथुरा, इलाहाबाद, मऊ, बरेली, वाराणसी, आजमगढ़, जैसे जिले कई अधिकारियों पर भ्रष्ट होने के आरोप लग चुके हैं। विभागीय जांच के बाद उन्हें आरोप पत्र भी दिया गया। इनमें से कुछ अधिकारियों का निलंबन हुआ, लेकिन कुछ अधिकारी अपने पदों पर बने हुए हैं।
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