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लोहिया के बाद श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी की हुई सपा सरकार, करोडों का ब्‍लू प्रिंट तैयार

अस्‍पताल के अपग्रेडेशन के लिए हेल्थ डिपार्टमेंट ने करोडों रुपए का ब्‍लू प्रिंट तैयार किया है। इसमें मरीजों को अस्‍पताल की नई बिल्डिंग के साथ ही कई अन्‍य सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी।

Dainik Bhaskar

Aug 26, 2015, 04:28 PM IST
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल।
लखनऊ. राजधानी स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्‍पताल के बाद अब समाजवादी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्‍ट में डॉ. श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्‍पताल शामिल हो गया है। अस्‍पताल के अपग्रेडेशन के लिए हेल्थ डिपार्टमेंट ने करोडों रुपए का ब्‍लू प्रिंट तैयार किया है। इसमें मरीजों को अस्‍पताल की नई बिल्डिंग के साथ ही कई अन्‍य सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी। इस अस्‍पताल को सरकार की तरफ से पहले ही वीवीआईपी अस्‍पताल का दर्जा मिल चुका है।
बनेगी 10 मल्टी स्टोरी बिल्डिंग
आने वाले दिनों में योजना के मुताबिक, बहुत जल्द डॉ. श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्‍पताल की सूरत बदलने वाली है। अस्‍पताल भवन के विस्‍तार को लेकर सरकार की तरफ से पहले ही राज्‍य सूचना विभाग की जमीन को ट्रांसफर करने का आदेश जारी हो चुका है। 3000 वर्ग मीटर की सूचना विभाग की जमीन पर 10 मंजिला मल्‍टी स्‍टोरी बिल्डिंग बनाने का प्रस्‍ताव है। इसके लिए यूपीआरएनएन एस्टीमेट तैयार कर रहा है।
ये होंगी खासियत
अस्‍पताल का कायाकल्‍प तीन चरणों में किया जाएगा। पूरे प्रस्‍ताव पर करीब 300 से 400 करोड़ रुपए के खर्च होने का अनुमान है। मास्‍टर प्‍लान के मूर्त रूप लेते ही अस्‍पताल नये रूप और रंग में दिखाई देगा। 10 मंजिला इस बिल्डिंग के बेसमेंट में पार्किंग भी बनाई जाएगी, जबकि पहले फ्लोर पर ओपीडी और दूसरी मंजिल पर दवा काउंटर के साथ ही तीसरी मंजिल पर 100 बेड के ट्रॉमा सेंटर के साथ ही 50 बेड के वेंटीलेटर सहित आईसीयू की भी सुविधा रहेगी। ये बिल्डिंग फुल एसी होगी। अस्‍पताल में मॉर्जन ऑपरेशन थियेटर भी बनाने का प्रस्‍ताव है। इसके अलावा कैफेटेरिया का भी निर्माण कराया जाएगा।
ये विभाग होंगे शामिल
अस्‍पताल को लेकर हेल्थ डिपार्टमेंट की तरफ से जो ब्‍लू प्रिंट तैयार किया गया है, उसमें मेडिसिन, दिल की बीमारी, गुर्दा रोग, रेस्पिरेट्री, नेफ्रोलॉजी, मानसिक रोग विभाग, चर्म रोग, बाल रोग, शल्‍य क्रिया, आर्थो, प्‍लास्टिक सर्जरी और बर्न, न्‍यूरो सर्जरी, यूरो सर्जरी, नेत्ररोग, दंत विभाग, नाक-कान-गला विभाग, रेडियोलॉजी, पैथालॉजी, रक्‍त कोष, इमरजेंसी डिपार्टमेंट, एनेस्थिसिया, एमआरआई डिपार्टमेंट शामिल हैं।
ट्रॉमा सेंटर और डायलिसिस यूनिट की भी व्‍यवस्‍था
एनएच-2 और एनएच-25 से सटे जिलों के बडे अस्‍पतालों को चिन्हित कर हेल्थ डिपार्टमेंट की तरफ से विश्‍व बैंक की मदद से अपग्रेडेशन का प्रस्‍ताव तैयार किया गया है। इन्हें ट्रॉमा सेंटर की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। इस योजना के तहत डिपार्टमेंट की तरफ से इस बिल्डिंग में 100 बेड का ट्रॉमा सेंटर भी खोले जाने की योजना है। इससे सडक हादसा और कैजुअल्टी के दायरे में आने वाले मरीजों का इलाज किया जा सके। वहीं, मंडल स्‍तर पर सरकार की तरफ से प्रस्‍तावित डायलिसिस यूनिट का भी संचालन अस्‍पताल में किया जाएगा।
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श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल की ओपीडी। श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल की ओपीडी।
24x7 घंटे होगी जांच की सुविधा
बड़े-बड़े सरकारी अस्‍पतालों में होने वाली पैथालॉजी की जांच को देखते सरकार की तरफ से आने वाले दिनों में 24x7 घंटे जांच की सुविधा उपलब्‍ध कराने का प्रस्‍ताव है। इस योजना के तहत यहां पर भी पैथालॉजी जांच की सुविधा 24 घंटे उपलब्‍ध होगी। इसके लिए हेल्थ डिपार्टमेंट की तरफ से आउटसोर्सिंग की दिशा में कदम उठाया जा रहा है। वहीं, यह अस्‍पताल 1000 बेड का होगा। वर्तमान में 400 बेड की सुविधा यहां पर उपलब्‍ध है।
 
एनएबीएच से होगा एक्रीडेशन
अस्‍पताल को उत्‍कृष्‍ट संस्‍थानों की श्रेणी में शामिल करने के लिए हेल्थ डिपार्टमेंट की तरफ से नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड फॉर हॉस्‍पिटल से मूल्‍यांकन भी कराया जाएगा, ताकि अस्‍पताल में मैन पावर बढ़ाने के साथ-साथ संसाधन भी सुनिश्चित किया जा सके।
 
रिसर्च के लिए बनेगा सभागार
इस बारे में अस्‍पताल के चिकित्‍सा अधीक्षक डॉ आशुतोष दूबे ने बताया कि अस्‍पताल का जो मास्‍टर प्‍लान है, उसमें एक ऑडिटोरियम भी बनाया जाएगा। इस ऑडिटोरियम में चिकित्‍सा के क्षेत्र में नित नई आ रही टेक्नोलॉजी के स्टडी के साथ ही रिसर्च पर ध्‍यान दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रस्‍तावित ऑडिटोरियम में कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकेंगे।
 
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए, शुरू होगा डीएनबी कोर्स...
फाइल फोटो: अस्पताल में भर्ती बच्ची। फाइल फोटो: अस्पताल में भर्ती बच्ची।
शुरू होगा डीएनबी कोर्स
अस्‍पताल के नये लुक में आने के बाद हेल्थ डिपार्टमेंट की पहल पर डीएनबी कोर्स का संचालन किया जाएगा। बता दें, मेडिकल के क्षेत्र में पीजी की सीटें काफी कम होने से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय डीएनबी के तहत एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को डिप्लोमा कोर्स कराया जाता है। एमबीबीएस डिग्री वाले डॉक्टर के लिए डीएनबी का डिप्लोमा कोर्स तीन साल का होता है। इसके साथ ही पीजी करने वाले डॉक्टर भी इसे कर सकते हैं। इनके लिए 6 महीने का कोर्स होता है। परीक्षा पास करने के बाद बोर्ड उन्हें संबंधित विषय में डिप्लोमा देती है।  
 
कोर्स के संचालन से यह होगा फायदा 
कोर्स शुरू होने से जिला अस्पताल में डाक्टरों की कमी की बड़ी समस्या खत्म हो जाएगी। इसके साथ कुछ मेडिकल सुविधाएं और अनुदान भी मिल सकता है। शासन का कोर्स शुरू करने के पीछे सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करना एक उद्देश्य है। अस्पताल में डीएनबी कोर्स के लिए जो एमबीबीएस डॉक्टर आएंगे उन्हें यहां काम भी करना पड़ेगा। इसके साथ ही अगर पीजी करने वाला कोई डॉक्टर डीएनबी में एडमिशन लेगा, तो एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमी भी दूर होगी।
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल।डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल की ओपीडी।श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल की ओपीडी।
फाइल फोटो: अस्पताल में भर्ती बच्ची।फाइल फोटो: अस्पताल में भर्ती बच्ची।
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