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हिंदी भाषा में बनी सोशल नेटवर्किंग साइट 'मूषक', कट्टी से टूटती है दोस्‍ती

Dainik Bhaskar

Sep 14, 2015, 06:25 AM IST

ट्वि‍टर की तर्ज पर वर्ल्‍ड हिंदी सम्‍मेलन की शुरुआत से पहले हिंदी नेटवर्किंग साइट ‘मूषक’ (Mooshak) को लॉन्‍च कि‍या गया।

'मूषक' की टीम के अहम सदस्य प्राचीर कुमार। 'मूषक' की टीम के अहम सदस्य प्राचीर कुमार।
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लखनऊ. बचपन में दोस्तों से दोस्ती और नाराज होने पर उनसे कट्टी याद है? एक बार आपको फिर से उसी कट्टी-मिट्ठी का आनंद उठाने का मौका मिल सकता है। इसके लिए आपको पूरी तरह से हिंदी में बनी सोशल नेटवर्किंग साइट 'मूषक' पर जाना होगा। इसको बनाने वाले टीम के अहम सदस्य प्राचीर कुमार नवाबी नगरी लखनऊ के ही रहने वाले हैं। उन्होंने अपने दोस्तों के साथ विचार-विमर्श के बाद ‘मूषक’ को वेब की दुनिया में मूर्त रूप दिया है। ट्वि‍टर की तर्ज पर वर्ल्‍ड हिंदी सम्‍मेलन की शुरुआत से पहले हिंदी नेटवर्किंग साइट ‘मूषक’ (Mooshak) को लॉन्‍च कि‍या गया। इस नई नेटवर्किंग साइट के टारगेट में हिंदी भाषी लोग हैं।
कॉफी के प्याले पर चर्चा और हुआ मूषक का जन्म
लखनऊ के इंदिरानगर के रहने वाले प्राचीर बताते हैं कि मूषक की शुरुआत एक संयोग से हुई। करीब दो साल पहले मूषक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अनुराग गौड़ को एक ग्राफिक डिजाइनर की तलाश थी, जो उनके टी शर्ट ब्रांड ‘साबूदाना’ के लिए बढ़िया डिजाइनिंग कर सके। इसके लिए उन्हें किसी ने प्राचीर के बारे में बताया। फिर क्या था अनुराग ने एक सुबह प्राचीर को कॉल किया। इसके कुछ घंटे बाद वे दोनों कॉफी के कप के साथ चर्चा कर रहे थे। अचानक साबूदाना के बारे में चर्चा करते-करते अनुराग ने प्राचीर को हिंदी भाषा में एक सोशल नेटवर्किंग साईट ‘मूषक’ को विकसित करने के विचार के बारे में बताया। साथ ही उनसे पूछा कि कैसे वे दोनों मिलकर इस मूषक को दिमागी कसरत से धरातल की जमीन पर ला सकते हैं। प्राचीर को भी यह विचार नया और दिलचस्प लगा। उन्‍होंने बिना एक पल गंवाए मूषक का हिस्सा बनने के लिए हामी भर दी।
तीसरा मूषक बने पुनीत
जिस समय प्राचीर ने ‘मूषक’ को विकसित करने के लिए हामी भरी थी, वे पुणे के इंदिरा कॉलेज में पढ़ रहे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात पुनीत शर्मा से हुई और वे भी ‘मूषक’ बनने के लिए तैयार हो गए। पुनीत जो पहले छोटे रूप में मूषक से जुड़े थे, काफी सोच-विचार के बाद मूषक से पूर्ण रूप से जुड़ गए। उनके अंदर भी अपनी मातृभाषा के लिए कुछ करने की ललक थी। उन्होंने प्राचीर के साथ में मिलकर ‘मूषक’ को हिंदी भाषियों के जीवन का हिस्सा बनाने पर काम शुरू कर दिया।

पुणे में स्‍टूडेंट्स ने की मदद
मूषक से जुड़ने के लिए या उसे हर घर तक पहुंचाने के लिए एक सेना की आवश्यकता तो होनी ही थी। इसके लिए प्राचीर और पुनीत ने पुणे के महाविद्यालयों से स्वयंसेवक जुटाने शुरू कर दिए। मूषक से जुड़ने के बाद प्राचीर और पुनीत ने जाना कि इसको चलाने के लिए एक चीज की सबसे ज्‍यादा जरुरत है- जूनून। यही जूनून है जो मूषक को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़‍िए, खुद ही हिंदी में बदल जाएगा अंग्रेजी में टाइप किया हुआ...

हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए हुई सोशल साइट 'मषक' की शुरुआत। हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए हुई सोशल साइट 'मषक' की शुरुआत।
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खुद ही हिंदी में बदल जाएगा अंग्रेजी में टाइप किया हुआ
अनुराग ने बताया कि मूषक को पूरी तरह से हिंदी में संचालित करने के लिए दो विकल्प दिए गए हैं। यदि कोई मूषक का खाताधारक चाहे तो हिन्दी में टाइप कर सकता है या फिर दूसरा विकल्प रोमन में टाइप करने का है, जिसे मूषक स्वयं देवनागरी लिपि में बदल देगा। यह सब ट्रांसलीट्रेशन के एप्लीकेशन को मूषक से एकीकृत करने से संभव हो सका है। इस तरह मूषक हर स्थिति में केवल हिन्दी में ही चलेगा।
 
ट्वीटर से है बेहतर
अनुराग गौड़ ने बताया कि सोशल मीडिया में हिन्दी की उपस्थिति करीब ना के बराबर है। इसको देखते हुए उन्होंने मूषक बनाने का संकल्प लिया था। इसे उन्होंने प्राचीर कुमार और पुनीत शर्मा के सहयोग से दो साल में तैयार किया। यह टि्वटर से बेहतर है। टि्वटर पर जहां 140 अक्षरों की सीमा होती है। मूषक में 500 अक्षर में अपना संदेश लिखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि यहां फॉलो की जगह अनुसरण करते हैं और अनकॉलो करने के लिए आपको कट्टी करनी पड़ती है।
 
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़‍िए, नहीं खोल पाएंगे फर्जी खाता...
कुछ दोस्‍तों ने मिलकर की 'मूषक' की शुरुआत। कुछ दोस्‍तों ने मिलकर की 'मूषक' की शुरुआत।
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नहीं खोल पाएंगे फर्जी खाता
गौड़ के मुताबिक टि्वटर पर एक व्यक्ति कई-कई नाम से फर्जी खाते खोल लेता है, लेकिन मूषक में खाता मोबाइल नंबर के जरिए ही खुलेगा। ऐसे में एक व्यक्ति एक ही खाता खोल पाएगा। यह मूषक की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए किया गया है। मूषक में एक अलग-अलग सूची होगी, जिसमें आप दोस्‍त, परिवार, नेता, अभिनेता जैसी सूचियां बनाकर उन्हें अलग-अलग रख सकते हैं। इससे ढेर सारे सम्पर्कों में दोस्‍तों को तलाशने में परेशानी नहीं होगी। गौड़ ने बताया कि आगे चलकर देश की सभी भाषाओं में मूषक को संचालित किया जाएगा।
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'मूषक' की टीम के अहम सदस्य प्राचीर कुमार।'मूषक' की टीम के अहम सदस्य प्राचीर कुमार।
हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए हुई सोशल साइट 'मषक' की शुरुआत।हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए हुई सोशल साइट 'मषक' की शुरुआत।
कुछ दोस्‍तों ने मिलकर की 'मूषक' की शुरुआत।कुछ दोस्‍तों ने मिलकर की 'मूषक' की शुरुआत।
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