फाइल फोटो: राजधानी स्थित नगर निगम मुख्यालय।
लखनऊ. राजधानी में मेट्रो चलाना तो आसान है लेकिन कचरा हटा पाना उतना ही मुश्किल है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि कचरा हटाने के लिए शुरू की गई सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की योजना पूरी तरह से खटाई में पड़ी है। इस योजना को शुरू हुए सात साल से भी ज्यादा का समय हो गया है लेकिन गंदगी के हालात जस के तस ही बने हुए हैं। सीएम अखिलेश यादव ने प्रोत्साहन देने के लिए घोषणा की थी कि जो वार्ड सफाई में अव्वल रहेगा, उसे 50 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा।
बताते चलें, साल 2007 में शुरू हुए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना का प्रमुख उद्देश्य था कि हर घर से गंदगी को बटोरना और उसका निस्तारण करना। इस योजना के अंतर्गत निस्तारित किए जाने वाले कूड़े को अलग कर उससे बिजली का निर्माण किया जाएगा। यही नहीं, इन कूड़ों से खाद बनाने की भी बात कही गई थी। पहले तो इस योजना का बजट 74 करोड़ था, जिसे बढ़ाकर 105 करोड़ रुपए कर दिया गया।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के सलाहकार प्रेम मेहरोत्रा का कहना है कि सात सालों में अगर कूड़ा का निस्तारण नहीं हो पाया तो इसके लिए सीएंडडीएस जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि सीएंडडीएस पर हमारा करीब 15 करोड़ रुपए बकाया है। इसी वजह से अभी तक प्लांट को भी नहीं चालू किया जा सका है। वे कहते हैं कि इससे पहले सात करोड़ रुपए का काम किया जा चुका है। इसका भुगतान भी अभी तक नहीं किया गया है।
वहीं, नगर निगम के एस.के. जैन का कहना है कि नगर निगम को पैसा देना था और वो पैसा हमने सीएंडडीएस को दे दिया है। अब उसकी ओर से ढिलाई बरती जा रही है। इस बारे में सीएंडडीएस के डायरेक्टर अनूप सक्सेना से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अभी मैं मीटिंग में हूं और बाद में बात करूंगा।
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