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बुजुर्ग मां को स्टेशन पर छोड़कर भाग गया था बेटा, एक महीने बाद बेटी को ऐसे मिली मां

किसी ने फोन कर निजी संस्था को जानकारी दी,उसके मेंबर आए। एक महीने तक इस बुजुर्ग महिला को अपने पास रखा।

Danik Bhaskar | Nov 08, 2017, 09:41 AM IST
बुजुर्ग मां के पास से ग्वालियर से लखनऊ का टिकट और 140 रुपए मिले थे। बुजुर्ग मां के पास से ग्वालियर से लखनऊ का टिकट और 140 रुपए मिले थे।
लखनऊ.  चारबाग रेलवे स्टेशन पर 100 साल की वृद्ध महिला को उसका बेटा बीते 1 अक्टूबर को छोड़ कर भाग गया। दो घंटे से ज्यादा देर तक बुजुर्ग महिला रेलवे स्टेशन पर ऐसे ही बैठी रही। किसी ने फोन कर हेल्पेज इंडिया संस्था को बुलाया, जिसने महिला को 1 महीने तक अपने पास रखा और इलाज करवाया। सोशल साइट्स पर जानकारी मिलने पर उसकी बेटी एक महीने बाद उसे अपने घर लेकर गई। बेटी के मुताबिक उसका भाई ग्वालियर में फलों का बड़ा व्यापारी है। 
 
पैसेंजर ने बचा ली जान
- चंपा 1 अक्टूबर 2017 को लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर बेहोशी की हालत में पड़ी थी। वहीं से गुजर रहे एक पैसेंजर ने उसकी हालत देखते हुए निजी संस्था को सूचित किया। संस्था के लोगों ने उसे शहर के बलरामपुर हॉस्पिटल में एडमिट करवाया, जहां उसकी जान बच सकी।
- होश में आने पर चंपा ने बताया कि वो अपने बेटे मुरारी के साथ ग्वालियर से वहां आई थी। स्टेशन पर उतरते ही बेटा गायब हो गया। महिला के मुताबिक उसका बेटा अगली ट्रेन पकड़कर ग्वालियर लौट गया।
- चंपा दो घंटे तक स्टेशन पर पड़ी रही। भूख-प्यास की वजह से वह बेहोश हो गई थी। 

दुपट्टे से बंधे मिले टिकट और 140 रुपए
 
- हेल्पेज इंडिया के डायरेक्टर अशोक कुमार और मेंबर रश्मि मिश्रा ने बताया, "महिला की हालत इतनी खराब थी कि वो अपने घर का पता तक नहीं बता पा रही थी। हमने टटोला तो उसके दुपट्टे में ग्वालियर टू लखनऊ का रेल टिकट और 140 रुपए बंधे मिले।
- "जीआरपी को इन्फॉर्म करने के बाद हम महिला को हॉस्पिटल ले गए। यहां उसका इलाज हो रहा है। चंपा को कोई गंभीर बीमारी नहीं है। सिर्फ बुढ़ापे की वजह से याद्दाश्त और चलने-फिरने की दिक्कतें हैं।"

ऐसे मिला चंपा को अपनों का साथ

- निजी संस्था की टीम लगातार उस महिला के बैकग्राउंड को तलाश रही थी। हालत सुधरने के बावजूद वो बोल नहीं पा रही थी, उसके होंठ कांप रहे थे।
- रश्मी बताती हैं, "हमने चंपा की फोटो और डिटेल्स फेसबुक-ट्विटर आदि सोशल प्लेटफॉर्म्स पर डालीं। एक एफएम रेडियो स्टेशन पर भी अनाउंस करवाया। एक महीने की मेहनत के बाद हमें एक महिला का फोन आया, जो खुद को इनकी बेटी बता रही थी।"
- "5 नवंबर को इनकी बेटी सुषमा इनसे मिलने हॉस्पिटल पहुंची। वो खुद 85 साल की है। अब चंपा उन्हीं के साथ रह रही हैं।"
 
 
बेटी ने बताई भाई की करतूत

-चंपा की बेटी सुषमा ने बताया, "मुरारी (60) मेरा छोटा भाई है। ग्वालियर में उसका फ्रूट्स का बिजनेस है, साथ ही उसका बेटा मोबाइल शॉप का ओनर है। उनके पास पैसों की कमी नहीं है, सिर्फ मां की बीमारी से तंग आकर उसने उन्हें इस हाल में छोड़ दिया। शायद भाई और शीला भाभी मां को बोझ समझते हैं। अगर वो मां से पीछा छुड़ाना चाहता है, तो कोई बात नहीं, अब वो मेरे ही पास रहेंगी।"
- मूलतः ग्वालियर की रहनेवाली चंपा की दूसरी बेटी ऊषा वाराणसी में रहती है। बड़ी बेटी सुषमा लखनऊ में अपने बच्चों के साथ रहती है।
रेडियो और सोशल साइट्स के जरिए महिला के बारे में जानकारी लोगों तक पहुंचाई गई। रेडियो और सोशल साइट्स के जरिए महिला के बारे में जानकारी लोगों तक पहुंचाई गई।
निजी संस्था के मेंबर ने हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती कराया। निजी संस्था के मेंबर ने हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती कराया।
एक महीने तक निजी संस्था ने अपने पास रखा। ट्रीटमेंट से लेकर खाने-पीने का हर खर्च उठाया। एक महीने तक निजी संस्था ने अपने पास रखा। ट्रीटमेंट से लेकर खाने-पीने का हर खर्च उठाया।
एक महीने के बाद बुजुर्ग महिला चंपा की बेटी उसके पास मिलने आई। एक महीने के बाद बुजुर्ग महिला चंपा की बेटी उसके पास मिलने आई।
5 नवंबर को उसकी बेटी उसे अपने घर लेकर गई। 5 नवंबर को उसकी बेटी उसे अपने घर लेकर गई।
बेटी से मिलने के बाद उसके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। बेटी से मिलने के बाद उसके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी।