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छह महीने में शुरू होगा पीजीआई के ट्रामा सेंटर का संचालन

7 वर्ष पहले
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लखनऊ. संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एसपीजीआई) के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल ट्रामा सेंटर के संचालन की शुरूआत छह महीने के अंदर शुरू हो जाएगी। 79 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन इस प्रोजेक्ट में 200 बेड की व्यवस्था की गई है। ट्रामा सेंटर में आने वाले मरीजों को यहां पर सुपर स्पेशीलिटी इलाज मिल सकेगा।
ट्रामा सेंटर के संचालन के लि‍ए पीजीआई द्वारा सरकार से स्टाफ की मांग को हरी झंडी मिल गई है। संभावना जताई जा रही है कि कुछ दिनों में पदों का विज्ञापन प्रकाशित कर भर्तियां की जाएंगी। ट्रामा सेंटर के मरीजों को सही समय पर इलाज देने के लिए शासन द्वारा पीजीआई को एक अत्याधुनिक एंबुलेंस की उपलब्धता कराई गई है। इसमें डीपफ्रीजर, वेंटीलेटर, स्पाइनल इंजरी, ईसीजी और कार्डियक के मरीजों के उपयोग में आने वाली सभी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। ट्रामा सेंटर की शुरुआत के बाद शासन द्वारा दो अन्य एंबुलेंस की उपलब्धता कराने के आसार हैं।

शासन से की है इतने स्टॉफ की मांग
इस बारे में निदेशक डॉ. आरके शर्मा ने बताया कि पीजीआई द्वारा ट्रामा सेंटर की शुरुआत के लिए शासन से पूरे नए स्टॉफ की मांग की गई है। इसमें 50 फैकल्टी, 600 नर्सें, 100 टेक्नीशियन सहित लगभग 800 पदों के सृजन की मांग की गई है।

ट्रामा में विशेष रूप से सक्रिय रहेंगे यह विभाग
सुपर स्पेशीलिटी तकनीकी से शुरू होने वाले पीजीआई के ट्रामा सेंटर में मुख्‍य रूप से न्यूरो ट्रामा, न्यूरोसर्जरी, क्रिटिकल केयर यूनिट और आर्थोपेडिक सर्जरी के विभाग सक्रिय होंगे। इस बारे में प्रो. शर्मा ने बताया कि ट्रामा सेंटर की उपयोगिता मुख्‍य रूप से सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल होने वाले लोगों को होती है। इन्हें ज्यादातर न्यूरो और आर्थोपेडिक की आवश्यकता होती है इसलिए ट्रामा सेंटर की शुरूआत के लिए इन विभागों की सक्रियता को विशेष स्थान दिया गया है।

मिल सकेंगे कैडिबर
प्रो. आरके शर्मा ने बताया कि पीजीआई में ट्रामा सेंटर की शुरूआत होने से यहां ब्रेन डेड के बाद ट्रांसप्लांट के लिए कैडेबर आसानी से मिल सकेंगे। इससे कैडेबर मिलने से अन्य मरीजों में आर्गन ट्रांसप्लांट आसानी से हो सकेगा।
फाइल फोटो: एसपीजीआई