लखनऊ. गौरी मर्डर केस में एसएसपी यशस्वी यादव पर मृतका के घरवालों को 'बंधक' बनाने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि गुरुवार को हजरतगंज स्थित जीपीओ पर एनजीओ के साथ जा रहे गौरी के परिवार एसएसपी ने धोखे से कैंप ऑफिस बुलाया। इसके बाद उन्हें वहां जबरन बैठा लिया गया। साथ ही गौरी के मां-बाप के सहित परिवार के सभी सदस्यों के
मोबाइल भी स्विच ऑफ करा दिए। एसएसपी अपना मोबाइल भी नहीं उठाया।
गुरुवार को एनजीओ उम्मीद की अगुवाई में कई अन्य एनजीओ गौरी हत्याकांड मामले में सही खुलासा करने की मांग के लिए धरना देने वाले थे। इस धरने में गौरी के मां-बाप को भी शामिल होना था। अरिहंत संस्था की रचना त्रिपाठी ने बताया कि एनजीओ के लोग सुबह से जीपीओ पर गांधी प्रतिमा के पास जमा हो चुके थे। वहां गौरी के माँ-बाप को भी पहुंचना था। उनके मुताबिक गौरी के मां-बाप जब साढ़े ग्यारह बजे घर से निकले तो उन्हें एसएसपी ऑफिस से फोन आया।
फोन पर उन्हें बताया गया कि एसएसपी गौरी मर्डर केस केस के सिलसिले में बात करने के लिए बुला रहे हैं। बताया जा रहा है कि जब गौरी मां-बाप वहां पहुंचे तो उन्हें एसएसपी ने एक कमरे में बैठा लिया। इसके बाद खुद आशियाना हत्याकांड के खुलासे में व्यस्त हो गए। धरनास्थल पर पहुंचने में देरी होने पर जब एनजीओ के लोगों ने गौरी के परिवार से संपर्क किया तो पता लगा कि वे आधे घंटे में धरनास्थल पहुंच जाएंगे।
एसएसपी ने मोबाइल करा दिया ऑफ
एक बार फिर जब एनजीओ के लोगों ने जब दोबारा संपर्क करने के कोशिश की तो गौरी के परिवार के लोगों का मोबाइल स्विच ऑफ मिला। धरनास्थल पर मौजूद एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने बताया कि एसएसपी से भी बात करने की कोशिश की जा रही है तो वे मोबाइल नहीं उठा रहे। कुछ एनजीओ कार्यकर्ता एसएसपी के कैंप ऑफिस भी गए थे तो उन्हें यह कह कर लौटा दिया गया कि कप्तान साहब किसी और हत्याकांड के खुलासे में व्यस्त हैं।
फाइल फोटो: गौरी की आत्मा की शांति के लिए परिजनों ने कराया शांति पाठ।