लखनऊ. राजधानी के दवा व्यापारियों के अच्छे दिन आने वाले हैं। केंद्र के सूक्ष्म और लघु उद्यम-क्लस्टर विकास कार्यक्रम (एमएसईसीडीपी) के तहत व्यापारियों को ज्यादा लाभ दिलाने की कवायद शुरू की जा रही है। इसके लिए जिला उद्योग केंद्र एक समूह संगठन बनाकर इन्हें प्रोत्साहित करने की कोशिश करेगा। साथ ही यह संगठन अत्याधुनिक मशीनों से युक्त कारखानों की स्थापना भी करेगा। वहीं, संगठन में काम करने वाले लोगों को अनुदान भी दिया जाएगा। इस योजना में आने वाले खर्च की 75 फीसदी धनराशि केंद्र सरकार वहन करेगी।
एमएसईसीडीपी का उद्देश्य सूक्ष्म और लघु व्यापार का विकास करना है। यह व्यापारी आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं। ऐसे में वे बड़े कारखाने और आधुनिक मशीनों का उपयोग नहीं कर पाते हैं। योजना के तहत एक ही तरह का रोजगार करने वाले कम से कम 25 व्यापारियों का ग्रुप बनाया जाएगा। हालांकि, इसके लिए संगठन के पास कारखाना लगाने के लिए खुद की जमीन होना जरूरी है।
केंद्र सरकार ने प्रस्ताव कर दिया था खारिज
बताते चलें, कुछ दिनों पहले राजधानी में फर्नीचर का व्यापार करने वाले कारोबारियों ने क्लस्टर योजना के तहत कार्यशाला लगाने का प्रयास किया था। केंद्र सरकार से योजना स्वीकृत हो गई। इसके बाद सरकार ने डालीगंज क्षेत्र में कारखाना लगाने के लिए जमीन भी दे दी, लेकिन केंद्र सरकार ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उनका कहना था कि व्यापारी के पास कार्यशाला के लिए अपनी जमीन होनी चाहिए।
दवा उद्यमियों को मिलेगी राहत
इंडियन इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के सदस्य प्रशांत भाटिया ने बताया कि शहर में दवा व्यापारियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन दिक्कतों को देखते हुए कई लोग यहां से पलायन कर चुके हैं। राजधानी में दवा की जांच के लिए सिर्फ एक कारखाना है, जिसके कारण व्यापारियों को दिल्ली या अन्य जगहों पर जाना पड़ता है। ऐसे में एमएसईसीडीपी के तहत राजधानी में दवा की जांच करने और कारखाना लगाने से कारोबारियों को काफी राहत मिलेगी।
प्रतीकात्मक तस्वीर।