इस लेडी ऑफिसर की कलम बनी पैशन, दुनिया में हुई फेमस, जीते कई अवॉर्ड

6 वर्ष पहले
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लखनऊ. कहते हैं कि अगर किसी भी चीज का पैशन हो तो सफलता निश्‍चित है। इसका उदाहरण हैं यूपी की लेडी ऑफिसर नीलम सक्‍सेना चंद्रा। इन्‍होंने कलम को पैशन बना लिया और अपने ख्‍यालों के बुलबुले को ऐसा पिरोया कि उनका नाम फोर्ब्‍स मैगजीन सहित लिम्‍का बुक में दर्ज हो गया।
कौन हैं नीलम चंद्रा
-लखनऊ से ताल्‍लुक रखने वाली नीलम रेलवे सर्विसेज की अधिकारी हैं। वर्तमान में डेप्युटेशन पर यूपीएससी में ज्वॉइंट सेक्रेटरी हैं।
-अब तक इनकी 700 से ज्यादा कविताएं-कहानियां नेशनल और इंटरनेशनल जर्नल्स में पब्लिश हो चुकी हैं। 30 पुस्तकें भी लिखी हैं।
-इनको एक साल में सबसे ज्यादा 9 बुक्स पब्लिश कराने के लिए ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड’ द्वारा रिकॉगनाईज किया गया।
-नीलम और इनकी बेटी सिमरन को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड, मिरकल बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड की ओर से प्रथम मां-पुत्री द्वारा पब्लिश बुक का अवॉर्ड मिला है।
-हाल ही में इनकी बुक्स ‘बुलबुले ख्यालों के’ और ‘टांके हैं कुछ सितारे’ पब्लिश हुई हैं।
-नीलम बताती हैं कि ये बुक्‍स यूथ को फास्ट लाइफ में हार के बावजूद आने वाली जीत के लिए मोटिवेट करने वाली है।
फेमस राइटर्स के रूप में फोर्ब्‍स मैगजीन में छपा नाम
-नीलम चंद्रा को 2014 में फोर्ब्‍स मैगजीन ने 78 फेमस राइटर्स में शामिल किया।
-इन्होंने अमेरिकन एम्बेसी में काव्य प्रतियोगिता में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
-नीलम को गुलजार साहब ने भी सम्मानित किया है।
-इन्होंने रेल मंत्रालय का प्रेमचंद पुरस्कार, रविंद्रनाथ टैगोर अंतरराष्‍ट्रीय काव्य पुरस्कार, चिल्‍ड्रेन ट्रस्ट अवॉर्ड सहित कई अवॉर्ड अपने नाम किए हैं।
-नीलम के लिखे गीत ‘मेरे साजन सुन सुन’ को रेडियो सिटी की ओर से फ्रीडम अवॉर्ड भी मिल चुका है।
हसबैंड करते हैं मोटिवेट, आजीवन लिखने का है इरादा
-dainikbhaskar.com से बातचीत में नीलम चंद्रा ने बताया कि हसबैंड प्रफुल्ल चंद्रा मेरी बहुत केयर करते हैं।
-वह और बेटी सिमरन चंद्रा हमेशा मुझे लिखने के लिए मोटिवेट करते रहते हैं।
-मैं परिवार के मोटिवेशन के चलते ही एक राइटर के रूप में काफी कुछ अचीव कर पाई हूं।
-मेरा कलम ही पैशन है और आजीवन लिखती रहूंगी।
आगे की स्‍लाइड्स में देखिए, गुलजार के साथ नीलम अन्‍य फोटोज