लखनऊ. मंगलवार को छात्र नेताओं ने मुख्यमंत्री को खून से पत्र लिखकर लखनऊ विश्वविद्यालय (एलयू) में चुनाव कराने की मांग की है। प्रोटोकॉल मंत्री अभिषेक मिश्रा से मुलाकात के बाद छात्र नेताओं सीएम को पत्र लिखा। पत्र में पार्टी को छात्रों की हितैषी बताते हुए छात्र हित में अविलंब चुनाव कराने की मांग की गई है।
छात्र नेता सोनू सिंह ने बताया कि छात्रसंघ चुनाव नहीं होने से विश्वविद्यालय सहित कॉलेजों में छात्र हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है। वहीं छात्र नेता संदीप तिवारी ने बताया कि अब चुनाव को लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर अभी कुछ दिन पूर्व छात्रों ने विश्वविद्यालय में जमकर हंगामा काटा था। छात्रों के हंगामे और धरना प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन के अधिकारियों ने विवि प्रशासन के साथ बैठक की थी। बैठक में एक समन्वय समिति गठित कर शासन स्तर पर छात्रों की बात रखने का निर्णय लिया गया था।
क्यों लगी है छात्रसंघ चुनाव पर रोक
छात्रसंघ चुनाव को लेकर एलयू में भाषा विज्ञान विभाग के छात्र हेमंत सिंह ने हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर दिल्ली यूनिवर्सिटी की तर्ज पर प्रवेश लेने की तिथि से आयु सीमा के निर्धारण की मांग की थी। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए कोर्ट ने यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा था। ऐसे में कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में चुनाव को लेकर लिंगदोह समिती की सिफारिशों के क्रम में कोर्ट द्वारा राज्य सरकार को वर्गीकरण किए जाने का आदेश देने के साथ ही जवाब दाखिल करने को कहा था। दो वर्ष बीतने के बाद भी शासन ने न तो वर्गीकृत किया है और न ही कोई जवाब दाखिल किया है। तभी से छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगा दी गई है।
लिंगदोह समिति की सिफारिशें
बीते 21 मार्च 2012 को तत्कालीन उच्च शिक्षा सचिव ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों के आधार पर एक शासनादेश जारी कर चुनाव कराने का निर्देश दिया था। इसमें जो मुख्य बिंदु सुझाए गए थे, उसमें नामांकन की तिथि से दस दिन के अंदर चुनाव समाप्त कराने का निर्देश दिया गया था। आयु सीमा के मसले पर स्नातक स्तर न्यूनतम आयु 17 और अधिकतम 22 साल। इसी क्रम में परास्नातक स्तर पर 24-25 साल। शोध छात्रों के लिए 28 साल तक चुनाव लड़ने की परमिशन है।
प्रतीकात्मक तस्वीर।