तस्वीर में: स्टूडेंट्स द्वारा बनाई गई सिंगल सिटर रेसिंग कार।
लखनऊ. सोसाइटी ऑफ ऑटोमेटिक इंजीनियर (सेय) ने इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के स्टूडेंट्स के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित किया। इसमें स्टूडेंट्स द्वारा कल-पुर्जों की सहायता से डिजाइन किए गए रेसिंग कार, छोटी कार और एफई साइकिल को लोगों के सामने प्रेजेंट किया गया।
सोसाइटी ऑफ ऑटोमेटिक इंजीनियर (सेय) हर साल नेशनल लेवल पर एक प्रतियोगिता का आयोजन करता है। इसमें देश भर के इंजीनियरिंग के छात्र हिस्सा लेते हैं। इनमें तीन स्तर पर कंप्टीशन होता है। इसमें 'बाहा एसएइ' जो रेसर कार का मॉडल बनाती है, दूसरा सुप्रा एफएई इंडिया जो छोटी कार के कांसेप्ट पर बनती है और तीसरी एफई साईकिल जो हाईब्रीड कांसेप्ट पर होता है। यहां छात्र डिजाइनिंग से लेकर उसके कल पुर्जे लाकर खुद ही इसे बनाते हैं।
टैलेंट को आगे लाने का काम करता है
कॉलेज में अस्सिटेंट प्रोफेसर और एडवाइजर तुहिन श्रीवास्तव बताते हैं कि एसएइ इंडिया देश भर में इंजीनियरिंग प्रतिभाओं को आगे लाने का काम करता है। उनका कॉलेज भी कई सालों से इसमें हिस्सा ले रहा है। वह बताते हैं कि छात्र यहां जो मॉडल बनाते हैं कि यदि उसकी प्रापर ब्रांडिग और रिसर्च कराई जाए तो बड़ा फायदा होगा। छात्रों को तो हार्डकोर नॉलेज मिलती ही है, क्योंकि उन्हें डिजाइनिंग से लेकर उसके मेकिंग तक सारा काम खुद करना होता है।
एफवन रेसिंग कार का मिनी कांसेप्ट
तुहिन बताते है कि 'बाहा एसएइ' में 25 छात्रों ने मिलकर ऑल टेरिरीयन (हर जगह चलाने लायक) रेसिंग कार बनाई थी। इसमें 10 बीएचपी का इंजन, महिंद्रा जियो का मैन्यूल ट्रांसमिशन (गेयर बाक्स), आल व्हील स्टेयरिंग सिस्टम ( चारों पहिए घूमते हैं), 21 मीटर टर्निंग रेडियस (घुमाने में कम जगह और पार्किंग में कम जगह घेरना) की खासियत के साथ करीब ढाई लाख में सींगल सीटर कार बनाई थी।
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