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Paytm से जुड़ी वो बातें जो आप जरूर जानना चाहेंगे, पढ़ें CEO की जुबानी

पेटीएम के फाउंडर और सीईओ विजय शेखर शर्मा को हाल ही में यूपी सरकार ने यश भारती अवॉर्ड से सम्‍मानित किया है।

Dainik Bhaskar

Oct 29, 2016, 08:05 AM IST
सचिन तेंदुलकर के साथ पेटीएम के सीईओ। सचिन तेंदुलकर के साथ पेटीएम के सीईओ।
लखनऊ. Paytm के फाउंडर विजय शेखर शर्मा को यूपी सरकार ने यश भारती अवॉर्ड से सम्मानित किया है। ये सम्‍मान उन्‍हें बिजनेस इंडस्‍ट्री में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए दिया गया है। विजय शेखर की कंपनी का टर्न ओवर आज 25 हजार करोड़ रुपए है। 16 साल पहले जिस कंपनी की नींव रखी गई, उसमें आज साढ़े छह हजार से ज्‍यादा इम्‍प्लाईज काम करते हैं। dainikbhaskar.com आपको बताने जा रहा है कि कैसे विजय शेखर शर्मा फर्श से अर्श पर पहुंचे और 2 लाख रुपए से शुरुआत करने के बाद वे आज करोड़ों के मालिक बन गए...
दो लाख रुपए लगाकर शुरू की थी कंपनी...
- विजय शेखर ने dainikbhaskar.com से बातचीत में बताया, 'मैं अमेरिका की एक कंपनी में नौकरी करता था, जहां मुझे अच्छी सैलरी मिलती थी।'
- 'फिर भी मेरा सपना था कि मेरी खुद की सिलिकॉन वैली जैसी कंपनी हो। एक दिन अचानक बैठे-बैठे सोचने लगा कि मैं कहा जा रहा हूं? क्‍या कर रहा हूं? अगर ऐसे ही नौकरी करता रहा तो मेरा सपना दम तोड़ देगा। सिलिकॉन वैली जैसी कंपनी का सपना कैसे पूरा होगा?'
- 'इसीलिए मैंने कंपनी से बिना बोनस लिए ही जॉब छोड़ दी। मेरे दोस्त वहीं काम करते रहे।'
- 'इसके बाद 2001 में मैंने 2 लाख रुपए लगाकर One-97 नाम की कंपनी की शुरुआत की, जो मोबाइल से जुड़ी वैल्यू एडेड सर्विसेज देती थी।
खाने के पड़ गए थे लाले...
- विजय शेखर ने बताया, 'हमारी कंपनी अच्छी चल रही थी। बड़ी-बड़ी कंपनियां हमारी क्लाइंट लिस्ट में थीं।'
- 'लेकिन कॉमर्स में कमजोर होने और एक्‍सपीरिएंस कम होने के कारण कंपनी की हालत एक साल में ही खराब होने लगी।'
- 'मैंने लोगों से उधार लेना शुरू कर दिया। जो पैसा बचता भी था, वो रेंट और सैलरी में ही चला जाता था।'
- 'हालत ये हो गई कि डिनर तक के पैसे नहीं थे। मैं दोस्तो के यहां बहाने से डिनर करने जाने लगा।'
- 'पैसे बचाने के लिए बस के बजाए पैदल चलता था। घर-घर जाकर कम्‍प्यूटर के छोटे-मोटे काम करने लगा। लेक्चर देने भी जाता था।'
- 'अब जिदंगी खाने के बजाए कोल्ड ड्रिंक और बिस्किट पर ही निर्भर हो गई थी।'
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़‍िए, जब विजय शर्मा की नहीं हो रही थी शादी...
27 अक्‍टूबर 2016 को अखिलेश यादव ने पेटीएम फाउंडर विजय शेखर शर्मा को यश भारती अवॉर्ड से सम्‍मानित किया। 27 अक्‍टूबर 2016 को अखिलेश यादव ने पेटीएम फाउंडर विजय शेखर शर्मा को यश भारती अवॉर्ड से सम्‍मानित किया।
- विजये ने आगे बताया, '2004 तक मेरी हालत बदहाल रही। लोग शादी का रिश्‍ता लेकर आते थे, लेकिन दोबारा लौटकर नहीं आते थे।'
- 'लोग ये सोचकर आते थे कि लड़का इंजीनियर है तो अच्‍छा कमाता होगा, लेकिन असलियत जानने के बाद ये कहकर चले जाते थे कि बाद में बताते हैं।
 
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़‍िए, 2005 में कैसे बदली किस्मत... 
नरेंद्र मोदी के साथ सेल्‍फी लेते विजय शेखर। नरेंद्र मोदी के साथ सेल्‍फी लेते विजय शेखर।
 - विजय बताते हैं, 'जब कंपनी की हालत बिल्‍‍कुल खराब हो गई तो मैं निराश हो गया। लेकिन ये सोच लिया था कि जो करना है, वो इसी में करना है।' 
- 'उसी समय मोबाइल के क्षेत्र में ग्रोथ आ गई और ज्‍यादातर लोगों ने अपना काम मोबाइल पर करना शुरू कर दिया।' 
- 'इस दौरान हमारी कंपनी की भी धीरे-धीरे ग्रोथ होने लगी। लोगों में इंटरनेट बेस्ड कामों की मांग बढ़ने लगी।' 
- '2005 में पहली बार कंपनी प्रॉफिट में आई और धीरे-धीरे हालात अच्छे होने लगे। अब सैलरी 1 लाख रुपए महीने हो चुकी थी और तब मेरी शादी हो गई। मेरा एक बेटा भी है।' 
 
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़‍िए, 2011 में पेटीएम की शुरुआत की... 
एक्‍ट्रेस तब्‍बू के साथ विजय शेखर शर्मा। एक्‍ट्रेस तब्‍बू के साथ विजय शेखर शर्मा।
- विजय ने बताया, 'मैं अक्सर देखता था कि लोगों को छुट्टे पैसे की बड़ी दिक्कत होती है।' 
- 'दुकानदार के पास जाने पर अगर उसे 9 रुपए लेने होते थे तो वो 10 का नोट लेकर एक टॉफी दे देता था।' 
- 'रिक्शेवाले को 13 रुपए देने हैं तो 2 रुपए छुट्टे के लिए कई दुकानों में भटकना पड़ता था। बस यहीं से मुझे पेटीएम को शुरू करने की प्रेरणा मिली।' 
- '2011 में मैंने पेटीएम की स्थापना की और देखते-देखते हमारी कंपनी का टर्नओवर 25 हजार करोड़ का हो गया।' 
 
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़‍िए, इंग्लिश वीक होने से क्लास में झेली हीन भावना... 
एप्‍पल के सीईओ टिम कुक के साथ विजय शेखर। एप्‍पल के सीईओ टिम कुक के साथ विजय शेखर।
- 'मेरी इंग्लिश काफी कमजोर थी। जब मैंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया तो वहां काफी हीन भावना का सामना करना पड़ा।' 
- 'वहां सब फर्राटेदार इंग्लिश बोलते थे, जबकि हिंदी मीडियम से पढ़ाई होने के चलते मेरी इंग्लिश काफी कमजोर थी।'
- 'मुझे डर लगा रहता था कि कहीं कोई प्रोफेसर इंग्लिश में कोई सवाल न पूछ ले। इसीलिए मैं टाइम पास के लिए कम्‍प्यूटर लर्निंग क्लास में चला जाता था। हां, मैथ्स और साइंस में मैं काफी अच्छा था।' 
 
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़‍िए, इंग्लिश के नोटबुक का मतलब समझने में लगा 1 साल... 
विजय ने बताया कि उन्‍हें इंग्लिश बोलने में काफी हिचक होती थी। विजय ने बताया कि उन्‍हें इंग्लिश बोलने में काफी हिचक होती थी।
- पेटीएम फाउंडर कहते हैं, 'मैंन इस कमजोरी (इंग्लिश) को अपनी ताकत बनाने की ठान ली और डिक्शनरी व इंग्लिश न्‍यूजपेपर पढ़ने लगा।'
- 'जब मैंने शुरू में डिक्शनरी देखी तो उसमें नोटबुक का मतलब कॉपी लिखा था, जबकि उस समय लोग कम्प्यूटर को भी नोटबुक कहते थे।' 
- 'मुझे ये मतलब समझने में ही 1 साल लग गया। फिर भी मैं उन दोस्तों से इंग्लिश में बात करने की कोशिश करता था, जिनके सामने हिचक नहीं लगती थी।' 
- 'इसके बाद मैं धीरे-धीरे इंग्लिश में ही चीजों को सोचने लगा। फिर मेरी इंग्लिश अच्छी होती गई और आज मैं ठीक-ठाक इंग्लिश बोलने लगा।'
 
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़‍िए, घर पर विरोध हुआ लेकिन हार नहीं मानी... 
पेटीएम ऑफिस का स्‍टाफ। पेटीएम ऑफिस का स्‍टाफ।
- 'घर पर बिजनेस करने का बहुत विरोध हुआ। घरवाले चाहते थे कि मैं नौकरी करूं, लेकिन मेरा मन खुद की कंपनी बनाने का था।' 
- 'मेरे घर में नौकरी वाला ही माहौल था। पापा स्कूल में टीचर थे, मम्मी हाउस वाइफ थीं। मेरे दादाजी काफी नामी गिरामी व्यक्ति थे, जिनके नाम पर विजयगढ़ में स्कूल था।' 
- 'मैंने शुरुआती पढ़ाई अलीगढ़ में हिंदी मीडियम से की। इसके बाद मैं भी इंजीनियर बनकर अमेरिका जाना जाता था।'
- 'बाद में जब दिल्ली के टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रानिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग गया तो लगा कि जो काम मैं अमेरिका में कर सकता हूं, वो काम में देश में रहकर भी कर सकता हूं।'  
 
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़‍िए, अब बनाएंगे पेटीएम बैंक...  
विजय ने बताया कि वे जल्‍द ही पेटीएम बैंक शुरू करने जा रहे हैं। विजय ने बताया कि वे जल्‍द ही पेटीएम बैंक शुरू करने जा रहे हैं।
- विजय बताते हैं, 'अब हम पेटीएम बैंक बनाने जा रहे हैं। इसमें कोई भी पैसा जमा कर सकता है।'
- 'बैंक आपको उसका इंटरेस्ट रेट भी देगी। इसके अलावा हम लोगों को क्रेडिट और डेबिट कार्ड भी बनाकर देंगे।'
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सचिन तेंदुलकर के साथ पेटीएम के सीईओ।सचिन तेंदुलकर के साथ पेटीएम के सीईओ।
27 अक्‍टूबर 2016 को अखिलेश यादव ने पेटीएम फाउंडर विजय शेखर शर्मा को यश भारती अवॉर्ड से सम्‍मानित किया।27 अक्‍टूबर 2016 को अखिलेश यादव ने पेटीएम फाउंडर विजय शेखर शर्मा को यश भारती अवॉर्ड से सम्‍मानित किया।
नरेंद्र मोदी के साथ सेल्‍फी लेते विजय शेखर।नरेंद्र मोदी के साथ सेल्‍फी लेते विजय शेखर।
एक्‍ट्रेस तब्‍बू के साथ विजय शेखर शर्मा।एक्‍ट्रेस तब्‍बू के साथ विजय शेखर शर्मा।
एप्‍पल के सीईओ टिम कुक के साथ विजय शेखर।एप्‍पल के सीईओ टिम कुक के साथ विजय शेखर।
विजय ने बताया कि उन्‍हें इंग्लिश बोलने में काफी हिचक होती थी।विजय ने बताया कि उन्‍हें इंग्लिश बोलने में काफी हिचक होती थी।
पेटीएम ऑफिस का स्‍टाफ।पेटीएम ऑफिस का स्‍टाफ।
विजय ने बताया कि वे जल्‍द ही पेटीएम बैंक शुरू करने जा रहे हैं।विजय ने बताया कि वे जल्‍द ही पेटीएम बैंक शुरू करने जा रहे हैं।
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