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गुपचुप तरीके से बेचा जा रहा है पान-मसाला, विभागों को लग रही लाखों की चपत

6 वर्ष पहले
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लखनऊ. वाणिज्यकर और सेंट्रल एक्साइज विभाग की आंख में धूल झोंककर राजधानी की कई बड़ी पान-मसाला फैक्ट्रियों में गुपचुप तरह से करोड़ों का मसाला अघोषित रूप से बनाया जा रहा है। टैक्स चोरी में शामिल ये फर्में राजधानी में दस करोड़ से भी अधिक की टैक्स चोरी का पान-मसाला हर महीने बेच रही हैं। इससे केंद्र और प्रदेश सरकार को राजस्व का भारी नुकसान पहुंच रहा है।

दो दिन पहले अमौसी के निकट गिंदन खेड़ा गांव में वाणिज्यकर की विशेष जांच टीम एसआईबी के छापे में 125 टन पान-मसाला के पैकिंग पाऊच पकड़े गए थे। इसके बाद शुरू हुई जांच में टैक्सचोरी के इस बड़े खेल का खुलासा हुआ है। वाणिज्यकर की टीमों ने गिंदन खेड़ा में जो अघोषित गोदाम पकड़ा है उसके असली मालिक के रूप में अभी तक कोई सामने नहीं आया है। अधिकारियों के काफी दबाव के बाद नोएडा के राहुल सिंह नाम के एक व्यक्ति का नाम सामने आया था, लेकिन अब तक माल पर दावा पेश करने के लिए कोई भी सामने नहीं आया।

अब तक की जांच में अधिकारियों को इसमें कमला पसंद, दबंग, पुकार, शिमला गोमती, गिरिराज और कायम पान मसाले के पैकिंग पाऊच मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन फर्मों का इससे पहले कई बार टैक्स चोरी का माल पकड़ा जा चुका है। इसके बाद भी पान-मसाले की ये फर्में लगातार टैक्सचोरी का पान-मसाला बना रही हैं। चूंकि 50 लाख से भी अधिक के उत्पादन पर सेंट्रल एक्साइज और इसकी बिक्री पर 40 फीसद वाणिज्यकर लगता है। इसलिए इसे बचाने के लिए ये फर्में उत्पादन और बिक्री कम दिखाने के लिए फर्जी फर्मों का सहारा लेती हैं।

एडीशनल कमिश्नर डॉ. बुद्धेशमणि ने बताया कि पकड़े गए पैकिंग पाऊच किस फर्म के लिए मंगाए गए थे इसका कोई दस्तावेज नहीं मिला है। यदि ये फर्में घोषित माल पान-मसाला की पैकिंग के लिए पाऊच मंगवाती तो उसके दस्तावेज मिलते। अब पाउचों का मालिकाना हक जानने के लिए सभी पान-मसाला कंपनियों को वाणिज्यकर और सेंट्रल एक्साइज के अधिकारी नोटिस भेजने जा रहे हैं। फिलहाल, एडीशनल कमिश्नर डॉ. बुद्धेशमणि के निर्देश पर अधिकारियों ने पांच ट्रक माल मीराबाई मार्ग स्थित मंडल कार्यालय पहुंचा दिया है। बा‍की माल को गोदाम में ही सील करके सचल दल अधिकारियों की ड्यूटी माल की सुरक्षा में लगा दी गई है।
फाइल फोटो।