लखनऊ. राजनीति में परिवारवाद अब आम बात हो गई है। सपा प्रत्याशी तेज प्रताप सिंह ने मैनपुरी से चुनाव जीत लिया है। ऐसे में सपा सुप्रीमो मुलायम के परिवार ने एक रिकॉर्ड बनाया। पोते तेजू ने दादा मुलायम सिंह यादव की विरासत संभाल ली है। ऐसे में अब इस परिवार की तीन पीढ़ियां एक साथ संसद में बैठेंगी। तेज प्रताप सिंह अपने दादा मुलायम सिंह, अपने दोनों चाचा धर्मेंद्र और अक्षय सहित चाची डिंपल यादव के साथ संसद भवन में नजर आएंगे। ऐसा होने पर अब यादव परिवार संसद में बैठने वाला देश का सबसे बड़ा कुनबा बन जाएगा।
मुलायम के राजनैतिक करियर के लिए मैनपुरी लोकसभा सीट काफी अहम रही है। साल 1996 में उन्होंने यहीं से अपना पहला संसदीय चुनाव लड़ा। इसके बाद साल 2004 में अपना दूसरा चुनाव जीता, लेकिन यूपी के सीएम बनने के बाद यह सीट छोड़ दी। उनके इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र यादव ने यहां से चुनाव जीता। इसके बाद साल 2009 में धर्मेंद्र यादव ने बदायूं से चुनाव लड़ा। साल 2014 के आम चुनाव में मुलायम सिंह ने मैनपुरी और आजमगढ़ से चुनाव लड़ा। चुनाव जीतने के बाद इन्होंने आजमगढ़ सीट अपने पास रखी और मैनपुरी से इस्तीफा दे दिया। उपचुनाव में उन्होंने अपने भतीजे स्व.
रणवीर सिंह के बेटे तेज प्रताप यादव 'तेजू' को उतारा।
देश का सबसे शक्तिशाली राजनीतिक कुनबा
यूपी में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी में परिवारवाद काफी मजबूत होकर उभरा है। आज यूपी की कमान सपा प्रमुख मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश यादव के हाथों में हैं। उनके बाद अब इस परिवार की तीसरी पीढ़ी का भी राजनीति में दखल हो चुका है। यही नहीं, मुलायम परिवार की महिलाएं भी राजनीति में आगे आ रही हैं।
तेजप्रताप सिंह यादव
तेजप्रताप सिंह मुलायम सिंह यादव के बड़े भाई रतन सिंह के पोते हैं। उन्होंने इंग्लैंड की लीड्स यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट साइंस में एमएससी की है। लोकसभा चुनाव लड़ने से पहले तेजू सैफई ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुए थे। इस क्षेत्र में सपा को मजबूत करने की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। जसवंतनगर से अपने बाबा शिवपाल सिंह यादव की जीत में इन्होंने अहम योगदान दिया। क्षेत्र के लोग कहते हैं कि तेजप्रताप से पहले उनके पिता
रणवीर सिंह यादव चुनाव की जिम्मेदारी निभाते थे। सैफई क्षेत्र के लोगों से उन्हें बेहद प्यार मिलता था। लोग उन्हें 'दद्दू' कहकर बुलाते थे।
रणवीर की मौत के बाद धर्मेंद्र बने ब्लॉक प्रमुख
जब तक रणवीर सिंह जीवित रहे, शिवपाल सिंह भी निश्चिंत रहते थे। उनके निधन के बाद यह जिम्मेदारी धर्मेंद्र यादव के कंधों पर आ गई। उन्हें सैफई का ब्लॉक प्रमुख बनाया गया। उन्होंने भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई, लेकिन बाद में वह मैनपुरी संसदीय क्षेत्र से सांसद हो गए। इसके बाद परिवार के लिए हमेशा से नाक का सवाल माने जाने वाले सैफई ब्लॉक पर तेजप्रताप यादव को खड़ा किया गया। इस सीट से वह निर्विरोध चुने गए।
दिखता है रणवीर का अक्स
तेजप्रताप सिंह ने अपने बाबा शिवपाल यादव को चुनाव जिताने के लिए सैकड़ों गांवों में पैदल यात्रा की। क्षेत्र के लोग उनमें रणवीर का अक्स देखते हैं। उनके सरल स्वभाव के चलते सैकड़ों लोगों बसपा छोड़कर सपा ज्वॉइन की। पिता की तरह खादी का कुर्ता-पाजामा और सदरी पहने तेजप्रताप भी बड़े-बूढ़ों और बुजुर्ग महिलाओं का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते।
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