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बिजनौर के आतंकियों की 'माल ए गनीमत' से हो रही थी फंडिंग!

7 वर्ष पहले
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
लखनऊ. बिजनौर से फरार आतंकियों के बैंक डकैती और लूट की घटनाओं में शामिल होने के संदेह ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। जानकारी मि‍ली है कि सिमी के आतंकियों को पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी से फंडिंग मिलनी बंद हो गई है। इसके चलते आतंकियों ने अपने 'जिहाद' को चलाए रखने के लिए दूसरे तरीके आजमाने शुरू कर दिए हैं।उन्‍होंने अपना अलग सेल बना लिया है और उसका नाम दिया है- 'माल ए गनीमत।' इसका मतलब है जिहाद के लिए लोगों से पैसा इकट्ठा करना।
भारतीय इंटेलिजेंस एजेंसियों को मि‍ले सुराग के मुताबिक पाकिस्तानी खुफि‍या एजेंसी आईएसआई ने भारत में इंडियन मुजाहिदीन और सिमी के आतंकियों को फंडिंग बंद कर दी है। इसके कारणों में और पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली के साथ अमेरिकी और भारतीय एजेंसियों का दबाव शामि‍ल है। अब आईएम और सिमी के आतंकियों ने मिलकर फंडिंग की अलग व्‍यवस्‍था की है।
'माल ए गनीमत' से हो रही फंडिंग का मतलब है जिहाद के लिए लोगों से पैसा इकट्ठा करना।हालांकि इसका सही मतलब तो है कि किसी पवित्र काम के लिए आम जनता का सहयोग लेना, लेकिन आतंकियों ने इसके लिए लूटपाट और सरकारी पैसे को लूटने का रास्ता अख्तियार किया है। इसका खुलासा तब हुआ जब आईएम का आतंकी असदुल्लाह अख्तर उर्फ हड्डी ने पूछताछ में इस नए आतंकी विंग का खुलासा किया। हड्डी पिछले वर्ष अगस्त में यासीन भटकल के साथ बिहार-नेपाल की सीमा से गिरफ्तार हुआ था।
दुबई में शुरू हुआ था 'माल-ए-गनीमत'
हड्डी ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि आईएम के संस्थापकों में से एक मिर्जा बेग ने 'माल-ए-गनीमत' की शुरुआत दुबई से की थी। इसका मकसद था कि दुबई में रहने वाले रईसों से पैसा वसूला जाए और उसे हवाला के जरिए भारत में बैठे आतंकियों तक पहुंचाया जाए।
पहले इन आतंकियों को पाकिस्तान से आर्थि‍क मदद मिलती थी, लेकिन जब मदद बंद हुई तो इन्हें आतंकी गतिविधियों को चलाने में मुश्किल आने लगी। इसके चलते इस विंग को बनाया गया। एनआईए के अफसरों को पूछताछ में यह मालूम हुआ कि हड्डी लगातार शादाब बेग के संपर्क में था। वहीं वहां के हवाला ऑपरेटरों के नाम हड्डी को बताता था, जिनके जरिए वसूली का पैसा भेजा जा रहा था।
आगे पढ़ि‍ए अलकायदा को भी जा रहा है पैसा...