तस्वीर में: गुरुवार को हजरतगंज में लगा जाम।
लखनऊ. राजधानी में आए दिन धरना प्रदर्शन से लगने वाले हजरतगंज में जाम और उसमें फंसी आम पब्लिक की कराहना का चोली-दामन का साथ है। अक्सर कोई ना कोई संगठन अपनी मांगों और आक्रोश को दिखाने के लिए चारबाग से लेकर हजरतगंज तक प्रदर्शन करते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि पूरे शहर का ट्रैफिक हांफने लगता है। गुरुवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। शिक्षकों और व्यापारियों के प्रदर्शन के कारण शहर का दिल हजरतगंज की धड़कनें थम-सी गईं।
व्यापारियों की बंदी और विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस तैनात थी। वहीं, विज्ञान और गणित के शिक्षक भी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने पहुंच गए। उनको पुलिस ने लाठीचार्ज कर भगा दिया, लेकिन गाड़ी और पैदल चलकर व्यापारी नारे लगाते जा रहे थे। इसके चलते जगह-जगह जाम की स्थिति बन गई। इस कारण मुख्य चौराहों पर गाड़ियां रेंगती नजर आईं। जाम के कारण स्कूली बच्चों की गाड़ियों के साथ मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस भी फंस गई।
अधिकारी तो बंद कमरे में करते हैं मौज
हजरतगंज जाम में फंसे सुधीर बताते हैं कि जाम लगना तो रोज का नाटक हो गया है। किसी भी समय निकलो, यहां जाम रहता ही है। अधिकारी बंद कमरे में मौज करते हैं और आम जनता परेशान होती है। विमल बताते हैं कि 5 मिनट की दूरी तय करने में आधा घंटा से ऊपर लग गया। मिताली ने कहा कि बच्चों को स्कूल से लेना था। जाम के कारण लेट हो गया। यह भी कोई धरने की जगह है। सरकार कुछ करती तो है नहीं, परेशान आम लोग होते हैं।
हाल ही में सीएम अखिलेश यादव ने भी राजधानी में जाम की स्थिति देखते हुए अधिकारियों को इसे दुरुस्त करने के सख्त आदेश भी दिए हैं। इसके बावजूद आला अधिकारी केवल दिशा-निर्देश देकर अपना काम पूरा कर लेते हैं।
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