तस्वीर में: पुलिस की गिरफ्त में आरोपी सिपाही विरेंद्र (हरी शर्ट में)।
लखनऊ. दो पत्नियों का खर्च उठाने के चक्कर में पुलिस का एक सिपाही लुटेरों के गिरोह का सरगना बन गया। साथियों के साथ मिलकर पुलिस की वर्दी पहनकर लूट की वारदातों को अंजाम देने लगा। जीआरपी ने कुछ दिन पहले एक फौजी से हुई लूट की घटना की पड़ताल शुरू की तो राज से पर्दा खुला।
दरअसल, 13 सितंबर की रात को मानक नगर रेलवे स्टेशन के आउटर पर खड़ी साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में सवार फौजी विजेंद्र शुक्ल से कुछ लोगों ने मारपीट और लूटपाट की थी। इस दौरान लूटेरे उसे ट्रेन से उतारकर एटीएम तक लेकर गए और डरा-धमकाकर एटीएम मशीन से 18 हजार रुपए भी निकलवा लिए। जीआरपी ने मामले की जांच शुरू की तो एक लुटेरे के पुलिस वर्दी में होने की बात सामने आई। इसके बाद से जीआरपी ने रेलवे परिसरों में आने वाले पुलिसकर्मियों की रेकी शुरू की।
शनिवार सुबह चार लोग जीआरपी के हत्थे चढ़े। गिरोह के मुखिया की शिनाख्त यूपी पुलिस के सिपाही वीरेंद्र यादव के रूप में हुई। वह आलमबाग के गढ़ी कनौरा में रहता था। वर्तमान में हजरतगंज थाने की स्टेडियम चौकी पर तैनात था। उसके साथ तीन अन्य लोग भी गिरफ्तार किए गए, जिनकी निशानदेही पर पुलिस ने फौजी से लूटा गया सारा सामान बरामद कर लिया है।
चौकी पर तैनाती के दौरान ही बनाया था प्लान
एडीजी रेलवे जावीद अहमद ने बताया कि चौकी पर तैनाती के दौरान ही वीरेंद्र का संपर्क मोहल्ले के आशीष से हुआ। इसके बाद वीरेंद्र के कहने पर आशीष ने विजय खेड़ा निवासी सलमान और पारा के अर्जुन नगर निवासी ऋषि को अपने साथ जोड़ लिया। इसके बाद चारों ने 13 सितंबर की रात फौजी विजेंद्र को अपना निशाना बना डाला।
आगे पढ़िए सिपाही ने कहा दो पत्नियों का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा था...