लखनऊ. चिकित्सा के क्षेत्र रोजाना हो रहे अनुसंधान ने नई उपलब्धि हासिल की है। अब गर्भ में पल रहे शिशु के अंदर पाए जाने वाले खराब जीन को भी ठीक किया जा सकता है। विदेशों में इस तकनीक का भरपूर प्रयोग हो रहा है। इस तकनीक में जांच के माध्यम से गर्भस्थ शिशु के खराब जीन का पता लगाकर उसे तकनीक द्वारा गर्भ में ही बदला जा सकता है। इससे जन्म के बाद बच्चे की अनुवांशिकता खराब नहीं होगी और उसे बीमारियों से छुटकारा भी मिल सकेगा।
यह जानकारी मंगलवार को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में आयोजित रिसर्च शोकेस में जेनेटिक्स एंड जिनोमिक्स इन मॉडर्न क्लीनिकल मेडिसिन सिम्पोजियम का आयोजन किया गया। यहां यूके से आए अनुवाशिंक रोग विशेषज्ञ डॉ. धावेंद्र कुमार ने इस तकनीक की जानकारी दी। डॉ. धावेंद्र कुमार ने बताया कि व्यक्ति में होने वाली सभी बीमारियां उसके अनुवांशिक गुणों के आधार पर होती हैं।
मरीज के शरीर की अनुवांशिकी ही उसकी बीमारी का कारण बनती है। इसलिए जरुरी है कि डॉक्टरों द्वारा मरीजों को उनकी बीमारी के लिए अनुवांशिकता के आधार पर ही दवाएं दें। इसके साथ ही दवाओं का निर्माण भी मरीजों की आनुवांशिकता के आधार पर ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के शरीर की अनुवांशिकी अलग-अलग होती है, जिसके कारण उसके शरीर की बीमारियां भी अलग-अलग होती हैं।
डॉ. कुमार ने उदाहरण देते हुए बताया कि मच्छर काटने से डेंगू की बीमारी होती है, यह सभी जानते हैं। जब मच्छरों की तादात बढ़ने का मौसम होता है तो मच्छर लगभग सभी व्यक्तियों को काटते हैं, लेकिन डेंगू हर किसी को नहीं होता। यह उदाहरण इस बात को बताता है कि डेंगू की बीमारी भी अनुवांशिकता पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति की अनुवांशिकता मच्छर काटने के बाद डेंगू को सपोर्ट करती है। उन्हें ही डेंगू होता है। उन्होंने बताया कि विदेशों में किसी भी मरीज को दवा उसकी अनुवांशिकता के आधार पर ही दी जाती है, जिससे उसके उत्तम परिणाम देखने को मिलते हैं। वहीं भारत में अभी अनुवांशिकता के आधार पर दवाओं का निर्माण शुरुआती चरण के शोधकार्यों में है।
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