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यूपी में नहीं चला मोदी मैजिक, बीजेपी हुई फेल, जानें हार के 10 कारण

7 वर्ष पहले
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फाइल फोटो: महंत आदित्यनाथ।
लखनऊ. यूपी उपचुनाव का रिजल्ट आ गया है। लोकसभा चुनाव में चला पीएम मोदी का जादू, इसमें वोटर्स को नहीं लुभा पाया है। इसके साथ ही उपचुनाव में बीजेपी के स्टार प्रचारक के तौर पर पेश किए जा रहे योगी आदित्यनाथ का सांप्रदायिक कार्ड भी पूरी तरह से फेल हो गया है। इसे आदित्यनाथ की नाकामी के तौर प भी देखा जा रहा है। आम चुनावों में पांच सीटों पर सिमटने वाली सपा ने उपचुनावों में कमबैक करते हुए बेहतर प्रदर्शन किया है और बीजेपी को जबरदस्त पटखनी दी है। ऐसे में मोदी सरकार के 100 दिन बाद हुई हार के कारणों का पता लगाने के लिए पार्टी माथापच्ची कर रहे हैं। dainikbhaskar.com आपको वह दस कारण बताने जा रहा है जि‍ससे यूपी उपचुनाव में बीजेपी की हार हुई।
यूपी उपचुनाव की घोषणा के साथ ही यह बाद ही यह बात चर्चा में थी कि बीजेपी के पास खोने के लिए दस सीटें है और सपा को पाने के लिए दस सीटें हैं। नतीजे बताते हैं कि बीजेपी अपनी प्रतिष्ठा नहीं बचा पाई और सपा ने जनता के बीच अपनी साख को मजबूत किया है। मैनपुरी लोकसभा सीट को मुलायम से छीनना बीजेपी के लिए सपना ही रह गया। वहीं, मुलायम सिंह यादव के परिवार का एक और सदस्य अब संसद में उनकी आवाज को मजबूत करेगा।

नहीं चला सांप्रदायिक कार्ड
पश्चिमी यूपी में आम चुनावों से पहले ही राजनीतिक दलों ने दंगों का खूब फायदा उठाया। इस पर जमकर तीखी बयानबाजी हुई और नतीजा यह हुआ कि वोटर्स हिंदू बनाम मुस्लिम में बंट गए और वोटों का ध्रुवीकरण हो गया। इसका पूरा फायदा बीजेपी को मिला।
उपचुनाव में भी बीजेपी ने यही कार्ड खेला और पश्चिमी यूपी को सांप्रदायिक मुद्दों पर लगातार गरम रखा। मथुरा में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अनौपचारिक तौर पर लव जिहाद का मुद्दा उठाया गया। इसे भुनाने के लिए योगी आदित्यनाथ को आगे भी किया गया। उन्होंने कई सुलगते हुए बयान दिए, लेकिन नतीजे देख कर यही कहा जा सकता है कि उनका ये कार्ड पूरी तरह से फेल हो गया।

अंदरूनी भीतरघात का परिणाम है हार
सूत्र बताते हैं कि 10 विधानसभा सीटों पर बीजेपी भीतरघात का शिकार हुई है। शीर्ष नेतृत्व ने हर सीट पर अपने सांसदों की टीम बिठाई तो थी, लेकिन वह अपने कैंडिडेट को जिताने के बजाय भितरघात की राजनीति में लगे हुए थे। कई सांसद अपने मनपसंद व्यक्ति को टिकट न दिए जाने से नाराज थे। ऐसे में बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व भी उपचुनाव में सांसदों की बेरुखी का शिकार हुई है।
आगे पढ़िए नहीं हुआ उस तरह का प्रचार...