लखनऊ. बीते शनिवार को यूपी की 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव संपन्न हुए। चुनावी नतीजे मंगलवार को घोषित किए जाएंगे। नतीजों को लेकर सबसे ज्यादा बेचैनी बीजेपी में दिख रही है। वोटिंग प्रतिशत कम होने से बीजेपी खेमे में साफ निराशा देखी जा सकती है। जिन सीटों पर उपुचनाव संपन्न हुए हैं, उन सभी सीटों पर बीजेपी का कब्जा है।
चुनावी विशेषज्ञों की मानें तो, बीजेपी को 5-6 सीटों का नुकसान हो सकता है। सत्तारूढ़ सपा को 3-4 और कांग्रेस को 1-2 सीटें मिने का अनुमान है। इसी क्रम में मैनपुरी सीट सपा के पाले में आती दिख रही है। ऐसे में अगर सपा को ज्यादा सीटें मिलती हैं तो वह संजीवनी का काम करेगी।
अगर भाजपा अपनी सीटें गंवाती है तो विरोधियों के हौसले निश्चित बुलंद होंगे। हालांकि, कांग्रेसियों में भी उपचुनाव के नतीजे को लेकर हलचल मची हुई है। ऐसे में यदि कांग्रेस एक से दो सीट जीतती है तो संगठन की लाज बच सकती है। यदि उपचुनाव में कांग्रेस को हार मिली तो नेताओं को नई कार्यसमिति में जगह मिलने के सभी रास्ते बंद हो जाएंगे।
बीजेपी के कुछ नेताओं का कहना है कि, यदि वोट प्रतिशत अधिक होता तो बीजेपी के लिए फायदेमंद होता। ऐसे में अपेक्षानुसार वोटिंग नहीं हुई है। वोटरों की उदासीनता ने भी मोदी लहर के खिलाफ सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी का दावा है कि, पार्टी की सभी सीटों पर जीत होगी। इधर, सीएम अखिलेश और सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी भी दावा कर चुके हैं कि उपचुनाव में पार्टी सबसे ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करेगी।
कांग्रेस प्रवक्ता द्वीजेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि, वोटरों की उदासीनता से साबित होता है कि मोदी सरकार ने जनता में विश्वास खो दिया है। उन्होंने कहा कि उपचुनाव में बीजेपी का नुकसान होना तय है। बीजेपी को आधी से ज्यादा सीटें गंवानी पड़ सकती हैं। उन्होंने कहा सपा सरकार से भी लोग परेशान हैं। लिहाजा इसका फायदा कांग्रेस को होगा।
प्रतीकात्मक तस्वीर।