फाइल फोटो।
लखनऊ. यूपी में लगातार बिजली की कमी को लेकर चारों तरफ से घिरी सरकार ने आखिरकार यूपी पॉवर जनरेशन कारपोरेशन, स्टेट ट्रांसमिशन कारपोरेशन और हाइड्रो पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन और एमडी कामरान रिजवी को उनके पद से हटा दिया। अभी उनको नई तैनाती नहीं दी गई है। उनकी जगह अब प्रमुख सचिव ऊर्जा और यूपीपीसीएल के चेयरमैन संजय अग्रवाल ने ली है।
सत्ता के गलियारों से जुड़े सूत्र बताते हैं कि, यूपी में लगतार बढ़ रही बिजली की किल्लत के चलते सीएम अखिलेश भी कामरान रिजवी से नाराज चल रहे थे। हालांकि, सीएम ने हमेशा केंद्र सरकार द्वारा पर्याप्त मात्रा में कोयला न मिलने की बात कही। सूत्रों की मानें तो, सीएम पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन के कामकाज से भी खुश नहीं थे। एक के बाद एक यूपी में बिजली की उत्पादन इकाइयां रख-रखाव के अभाव में बंद हो रहीं थीं। इसके चलते भी यूपी को बिजली संकट से गुजरना पड़ रहा था। बिजली संकट को लेकर सीएम ने कई बार उन्हें तलब भी किया था।
नियामक आयोग ने भी लगाई थी फटकार
बीती अगस्त के महीने में यूपी विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन देश दीपक वर्मा ने भी कामरान रिजवी को तलब किया था। कामरान रिजवी बिजली उत्पादन से संबंधित कागजात लेकर उनके सामने उपस्थित हुए थे। चेयरमैन ने उनसे लगातार घट रहे बिजली उत्पादन को लेकर हिदायत भी दी थी। बताया जाता है कि, कामरान रिजवी ने आयोग के सामने बिजली उत्पादन की व्यवस्था जल्दी सुधार लेने का आश्वासन दिया था।
बंद होते गए एक के बाद एक पॉवर प्लांट
बीते हफ्ते पारीछा उत्पादन घर की 110 मेगावाट की एक नंबर इकाई ट्रिप हो गई। इसके बाद सिलिकॉन की मात्रा बढ़ने के कारण पनकी की भी 110 मेगावाट उत्पादन क्षमता की इकाई को बंद करना पड़ गया। 220 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाली दो इकाइयों के अचानक बंद होने से राज्य की बिजली व्यवस्था पटरी से उतरने लगी। टांडा, रिहंद, सिंगरौली और रोजा बिजली संयंत्रों से बिजली उत्पादन पहले ही बंद हो चुका है। यही नहीं प्रदेश में बिजली की कमी कई जिलों में कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनने की नौबत आ गई।
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