लखनऊ. हाईकोर्ट द्वारा पिछले तीन दिनों से जारी अवमानना पर सख्ती ने उत्तर प्रदेश शासन को हलकान कर दिया है। तीन दिनों में उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव से लेकर दर्जनों अफसरों पर हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश जारी कर नोटिस जारी किया है, इनमें कई के खिलाफ तो गैर जमानती वारंट जारी कर दिया गया है। खुद प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह कई घंटे अदालत में हिरासत में ही घंटों खड़े रहे। अदालती आदेशों पर सरकारी अफसरों की ढिलाई पर हाईकोर्ट के इस सख्त रवैये से उत्तर प्रदेश शासन बुरी तरह हिल गया है। शासन ने अब डैमेज कंट्रोल शुरू करते हुए न्यायालय से जुड़े ऐसे सभी मामलों में आला अफसरों को विशेष चौकसी बरतने के आदेश दिए हैं।
वहीं कई विभागों के प्रमुख सचिव और सचिव इन दिनों सिर्फ अपने विभाग से जुड़े वाद जो न्यायालय में लंबित हैं, उन्हीं की पूरी जानकारी लेने और प्रभावी पैरवी की रूपरेखा बनाने में व्यस्त हैं। शासन से जुड़े एक अफसर के अनुसार हाईकोर्ट की इतने बड़े स्तर पर सख्ती पहली बार देखने में आई है। इसका असर ये हुआ कि कल हुए ट्रासंफर पोस्टिंग के बाद से जो भी अफसर आज नए पद भार ग्रहण कर रहे हैं, वे पद पर तैनात रहे पूर्व अधिकारियों से कानूनी वादों से जुडी़ जानकारी भी ले रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार जावेद उस्मानी ने खुद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शिवकीर्ति सिंह से मुलाकात की। इस दौरान मुख्य सचिव ने अवमानना मामलों में सरकार का पक्ष रखा। इस मुलाकात के बाद चीफ सेक्रेटरी की तरफ से प्रदेश के सभी विभागों के प्रमुख सचिवों और सचिवों को निर्देश जारी किया गया है कि उनके विभाग में जो भी लंबित अवमानना या इस तरह के मामले लंबित हैं, उन पर नजर रखें और प्रभावी पैरवीं करें। इन मामलों में ढिलाई न तो कोर्ट बर्दाश्त करेगा न ही उत्तर प्रदेश शासन ही बर्दाश्त करेगा। वैसे मुख्य सचिव इससे पहले भी गृह और न्याय विभाग के अधिकारियों को तलब कर अवमानना कार्रवाइयों से हो रही फजीहत से बचाव के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दे चुके हैं।
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