फोटो: पीजीआई में दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल राम नाईक, स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन और छात्र-छात्राएं।
लखनऊ. डॉक्टरी की डिग्री हासिल करने वाले चिकित्सकों से जनता की काफी उम्मीदें जुड़ी रहती है। ऐसे में जब वे यहां से निकले तो डिग्री लेते समय ली गई शपथ का हमेशा ध्यान रखें। एक डॉक्टर के रूप में आपकी जिम्मेदारी व्यक्ति और समाज के प्रति बढ़ जाती है। यह बात मंगलवार को पीजीआई के 19वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहीं।
हाल ही में बर्खास्त किए गए प्रशिक्षु न्यायाधीशों का उदहारण देते हुए राम नाईक ने कहा कि यह इतिहास में पहला ऐसा मामला है जिसमें इस तरह का दंड मिला है। इससे सबक लेने की जरूरत है। ऐसे में आज आप सभी को जो शपथ दिलाई गई है उसे अपने सेवाकाल में रहते हुए कभी न भूलें। सभी लोग अपने क्षेत्र की नीति, न्याय और व्यवहारिक सिद्धांतों के प्रति कटिबद्ध रहें। उन्होंने कहा कि पीजीआई निश्चित तौर पर बेहतर सेवाएं दे रहा है लेकिन ग्रामीण अंचल के बहुत से लोग यहां तक नहीं पहुंच पाते।
डॉक्टर ग्रामीण अंचल में खुलने वाले स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं जाते जो ठीक बात नहीं है। सभी का प्रयास होना चाहिए कि ग्रामीण अंचल के रोगियों के लिए काम करें। उन्होंने वृंदावन में आयोजित एक आंख के शिविर की चर्चा करते हुए कहा कि वहां मुंबई से आए डॉक्टरों ने महज तीन दिन में 206 कैडरेक की सर्जरियां की है। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने पीएचडी, एमडी, डीएम, एमसीएच, नर्सिंग, पीडीसीसी और डिप्लोमा की डिग्रियां वितरित कीं।
हर विश्वविद्यालय में होगा दीक्षांत समारोह
कई विश्वविद्यालयों में नहीं हो रहे दीक्षांत समारोह के मामले पर नाईक ने कहा कि जब वह राज्यपाल बने तब उन्हें पता चला कि वह 24 विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं। उन्होंने सभी कुलपति से बात कर यह जानना चाहा कि उनके यहां दीक्षांत समारोह होता है कि नहीं। पता चला कि कई विश्वविद्यालय में चार-पांच सालों से समारोह नहीं हुए। ऐसे में उन्होंने सभी को पत्र लिखकर समारोह की तारीख निर्धारित करने की बात कही है।
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