लखनऊ. गंगा को प्रदूषण मुक्त करने और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों का सख्ती से अनुपालन करने के लिए यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तीन फ्लाइंग और सर्विलांस स्क्वायड गठित किए हैं। बोर्ड के तीन वरिष्ठ मुख्य पर्यावरण अधिकारियों को इन दस्तों की कमान सौंपी गई है। ये दस्ते गंगा को प्रदूषित करने वाले उद्योगों का मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगे। इसके साथ ही इन्हे निरीक्षण में किसी भी तरह का प्रदूषित उत्प्रवाह गंगा में जाता मिलने पर उद्योग के खिलाफ सीधे बंदी के आदेश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।
यूपी सरकार ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह गंगा को प्रदूषित करने वाले उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। इसके साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने भी गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हाई पॉवर कमेटी गठित करके गंगा को प्रदूषित करने वाले सभी उद्योगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
मुख्य पर्यावरण अधिकारी संभालेंगे कमान
पहले दस्ते की कमान मुख्य पर्यावरण अधिकारी एसके सिंह को सौंपी गई है। पर्यावरण अभियंता राजेंद्र सिंह इस दस्ते के सह प्रभारी होंगे। दूसरे दस्ते की कमान मुख्य पर्यावरण अधिकारी डॉ. मधु भारद्वाज को दी गई है जबकि पर्यावरण अभियंता एसके मिश्र सह प्रभारी होंगे। इसी तरह तीसरे दस्ते का इंचार्ज मुख्य पर्यावरण अधिकारी डॉ. राजीव उपाध्याय को बनाया गया है। वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता अमित चंद्रा इस दस्ते के डिप्टी बनाए गए हैं।
प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर होगी एफआईआर
बोर्ड अध्यक्ष जावेद आबिदी ने शुक्रवार को बोर्ड मुख्यालय में सदस्य सचिव जेएस यादव और सर्विलांस दस्ते के अधिकारियों के साथ बैठक की। आबिदी ने बताया कि यूपी सरकार ने गंगा को निर्मल करने के अभियान को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में रखा है। बोर्ड अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह गंगा के किनारे स्थापित सभी उद्योगों की सघनता से जांच करके उन सभी उद्योगों को चिह्नित करें, जिनका प्रदूषित पानी गंगा को मैला कर रहा है। जांच में जिस भी इंडस्ट्री का प्रदूषित पानी गंगा में जाता मिलेगा, उस उद्योग को तत्काल बंद कराने के साथ ही इंडस्ट्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी।
प्रतीकात्मक तस्वीर।