यूपीटीयू के कुलपति आर.के. खांडल की फाइल फोटो।
लखनऊ. यूपी में तकनीकी शिक्षा की गिरती साख सुधरने का नाम नहीं ले रही है। वहीं, परास्नातक (पीजी कोर्स) के लिए निर्धारित मानकों का निरीक्षण करने के लिए यूपी प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) के कुलपति प्रो. आर.के. खांडल ने गठित कमेटियों को थोक के भाव के कॉलेजों को आवंटित कर दिया है। समस्या ये है कि इन कमेटियों में शामिल विशेषज्ञ एकसाथ इतनी संख्या में कॉलेजों का निरीक्षण कैसे कर सकेंगे?
इससे पूर्व गठित कमेटियों में से हर एक कमेटी को महज चार से पांच कॉलेंजों की ही जिम्मेदारी दी जाती रही है। लेकिन इस बार एमटेक, एमफार्म, एमआर्क जैसे कोर्सों के संचालन को लेकर र्निधारित मानकों के निरीक्षण के लिए प्रत्येक कमेटी को न्यूनतम नौ और अधिकतम 45 कॉलेज आवंटित किए गए हैं। मजे की बात यह है कि, ज्यादा कॉलेज उन्हीं कमेटियों के सदस्यों को दिया गया है, जो विवि. प्रशासन के करीबी हैं।
विवि. द्वारा गठित की गई कमेटियों को दिए गए कॉलेजों की सूची देखने के बाद यूपी में तकनीकी शिक्षा के स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता हे। यह कहना कतई अतिश्योक्ति नहीं होगा कि, तकनीकी शिक्षा के मानक बिल्कुल हाशिए पर जा चुके हैं। ऐसे में कई कमेटी सदस्य कॉलेजों की संख्या देखकर अभी से शिथिल पड़ चुके हैं।
प्रो. बी.एन. मिश्र को मिले सबसे ज्यादा कॉलेज
इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के बायोटेक विभाग के प्रो. बी.एन. मिश्र को सबसे ज्यादा कॉलेज निरीक्षण के लिए आवंटित किए गए हैं। साल 2013 में राज्य स्तरीय यूपी एसईई प्रवेश परीक्षा मामले में प्रो. मिश्र पर पहले से ही जांच चल रही है। सूत्रों की मानें तो, वो विवि. के करीबियों में से एक हैं।
आगे पढ़िए गठित कमेटी में किसे-किसे मिली कॉलेज के निरीक्षण की जिम्मेदारी...