लघु सिंचाई और पशुधन मंत्री राजकिशोर सिंह की फाइल फोटो।
लखनऊ. यूपी के लघु सिंचाई और पशुधन मंत्री राजकिशोर सिंह ने बुधवार को कहा, ‘मेरे कार्यकाल में चेकडैम के निर्माण में कोई घपला नहीं हुआ है। पिछले दो सालों में पूरे यूपी में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सिर्फ 183 करोड़ रुपए के चेकडैमों का निर्माण हुआ है। इसमें अब तक 679 चेकडैम बने हैं। ऐसे में यह कहना कि 200 करोड़ की अनियमितता हुई है यह गलत होगा।’ उन्होंने कहा कि तथ्यात्मक सूचना नहीं मिलने की वजह से मीडिया में भ्रामक खबरें चल रही थी। ये बातें उन्होंने विधानसभा में मीडिया के सामने कही। बताया जा रहा था कि मामला पांच हजार करोड़ का है, जबकि लघु सिंचाई विभाग का बजट कभी भी इतना ज्यादा नहीं रहा।
बताते चलें कि 11 नवंबर को प्राविधिक शिक्षामंत्री शिवाकांत ओझा ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि 500 चेकडैम के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता ठीक नहीं है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि लघु सिंचाई विभाग द्वारा दो साल के भीतर प्रतापगढ़ में 200 करोड़ रुपए की लागत से 148 घटिया चेकडैमों का निर्माण कराया गया है। इसकी उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए। ऐसे में उन्होंने अपनी ही सरकार के विभाग पर सवाल उठाकर सनसनी फैला दी थी। मामला बढ़ने पर बुधवार को खुद लघु सिंचाई मंत्री राजकिशोर सिंह को सामने आना पड़ा।
लघु सिंचाई मंत्री ने जारी किए आंकड़े
लघु सिंचाई मंत्री राजकिशोर ने मामला बढ़ता देख आंकड़े जारी कर अपनी सफाई दी। आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय पेयजल कार्यक्रम के तहत इलाहाबाद जिले में 22 चेकडैम बनने थे जिसका बजट 7.5 करोड़ था, जिसमें अभी तक 11 चेकडैम बने हैं। वहीं, कौशाम्बी में 17 चेकडैम 6.6 करोड़ की लागत से बनने थे जिसमें से 15 बन चुके हैं। दूसरी ओर, फतेहपुर में 13 चेकडैम बनने थे, जिनमें 11 बने हैं। इसका बजट चार करोड़ का है।
प्रतापगढ़ में 111 चेकडैम में से 102 बनकर तैयार
इसके अलावा प्रतापगढ़ में 111 चेकडैम बनना था जिसमें से 102 बना है। इस पर 33.96 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। लघु सिंचाई मंत्री राजकिशोर सिंह का कहना है कि उन्होंने 2013-14 में लघु सिंचाई मंत्री का पद संभाला है। ऐसे में यह कैसे कहा जा सकता है कि उनके कार्यकाल में कोई घोटाला हुआ है।
आगे पढ़िए किस-किस कार्यक्रम के तहत बने चेकडैम…