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यूपी के पूर्व CM राम नरेश यादव का 89 साल की उम्र में निधन

Dainik Bhaskar

Nov 22, 2016, 09:29 AM IST

वे 89 साल के थे। उनका लखनऊ स्थित पीजीआई में इलाज चल रहा था।

रामनरेश यादव 23 जून 1977 से 28 फरवरी 1979 तक यूपी के सीएम रहे। (फाइल) रामनरेश यादव 23 जून 1977 से 28 फरवरी 1979 तक यूपी के सीएम रहे। (फाइल)
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लखनऊ. मध्‍यप्रदेश के पूर्व गवर्नर और यूपी के पूर्व सीएम रामनरेश यादव का मंगलवार को लखनऊ में निधन हो गया। वे 89 साल के थे। उनका लखनऊ के पीजीआई में इलाज चल रहा था। उनके फेफड़े में इन्‍फेक्‍शन था। उनके निधन की खबर के बाद मध्‍य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी दुख जताया। पूर्व सीएम का शव जब घर पहुंचा तो वहां कोहराम मच गया। परिवार को सांत्वना देने के लिए गवर्नर राम नाईक, सीएम अखिलेश यादव, सपा के मंत्री शारदा प्रताप शुक्ल भी पहुंचे। दो महीने से ज्‍यादा समय से थे एडमिट...
- पीजीअाई के डायरेक्‍टर डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि रामनरेश दो महीने से ज्‍यादा समय से यहां एडमिट थे।
- उनके फेफड़े में इन्‍फेक्‍शन था, जिसकी वजह से वे वेंटिलेटर पर थे। एडमिट होने के एक हफ्ते बाद ही वे वेंटिलेटर पर आ गए थे।
- इसके बाद उन्‍हें सास से रिलेटेड बीमारियां बढ़ती चली गईं।
व्यापमं घोटाले में जुड़ा था नाम...
- एमपी के गवर्नर रहते रामनरेश यादव का नाम व्यापमं स्कैम में जुड़ा था। इसके बाद उन्हें गवर्नर पद से हटाने की मांग उठी थी।
- हालांकि, रामनरेश का कहना था कि जांच पूरी होने तक उन्हें दोषी करार नहीं दिया जा सकता। लिहाजा वह अपने पद पर बने रहेंगे।
2009 में पहली बार दर्ज हुई एफआईआर, रामनरेश पर भी लगे आरोप
- व्यापमं घोटाले में पहली एफआईआर 2009 में दर्ज हुई। राज्य सरकार की बनाई समिति ने 2011 में अपनी रिपोर्ट जारी की, जिसमें 100 से ज्‍यादा लोगों को पुलिस ने अरेस्‍ट किया था। मामले में अब भी कई लोग फरार हैं।
- अब तक इस घोटाले में 2000 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसमें मप्र के पूर्व शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा समेत अन्य 400 से ज्‍यादा नेताओं के नाम भी शामिल हैं।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई को मामले की जांच सौंपी गई थी।
- 2015 में व्यापमं घोटाले में करप्‍शन, साजिश और धोखाधड़ी जैसे आरोपों का सामना कर रहे रामनरेश यादव ने अपने बचाव में इनडायरेक्‍टली सीएम शिवराज सिंह चौहान पर लगे आरोपों को ढाल बना लिया था।
- उन्होंने उस एक्सेल शीट की गंभीरता से जांच की मांग उठाई थी, जो पिछले दिनों कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने एसआईटी को सौंपी थी।
- दिग्विजय सिंह का आरोप था कि संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा की मूल एक्सेल शीट के साथ छेड़छाड़ की गई है और 48 स्थानों पर सीएम (चीफ मिनिस्टर) शब्द को डिलीट कर उसकी जगह राज्यपाल, उमा भारती और मिनिस्टर लिख दिया गया है।
- इसके पहले रामनरेश यादव ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को कैंसिल कराने के लिए जबलपुर हाईकोर्ट में 2015 में ही याचिका दायर कर दलील दी थी कि एक आरोपी के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज करना संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है।
- इस पर हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ एफआईआर रद्दर करने का आदेश दिया था।
किसानों की बने थे आवाज, 1977 में मिली थी सीएम की कुर्सी
- जुलाई 1928 में यूपी के आजमगढ़ में रामनरेश का जन्म हुआ था।
- राम नरेश पहली बार चौधरी चरण सिंह की मदद से 1977 में जनता पार्टी के सीएम बने थे। वे किसानों की आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे।
- उनको राजनीतिक माहौल घर से ही मिला था, क्योंकि उनके पिता गया प्रसाद महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. राममनोहर लोहिया के अनुयायी थे।
- उन्‍होंने बीएचयू से बीए, एमए और एलएलबी की पढ़ाई की और यहीं छात्र संघ की राजनीति से भी जुड़े रहे।
- इसके बाद कुछ वक्त के लिए वे जौनपुर के पट्टी स्थित नरेंंद्रपुर इंटर कॉलेज में प्रवक्ता भी रहे। 1953 में उन्‍होंने आजमगढ़ में वकालत की शुरुआत की।
- रामनरेश ने समाजवादी विचारधारा के तहत विशेष रूप से जाति तोड़ो, विशेष अवसर के सिद्धांत, बढ़े नहर रेट, किसानों की लगान माफी, समान शिक्षा, आमदनी और खर्च की सीमा बांधने, वास्तविक रूप से जमीन जोतने वालों को उनका अधिकार दिलाने, अंग्रेजी हटाओ आदि आंदोलनों को लेकर कई बार गिरफ्तारियां दीं।
- इमरजेंसी के दौरान वे मीसा और डीआईआर के अधीन जून 1975 से फरवरी 1977 तक आजमगढ़ जेल और केंद्रीय कारागार नैनी, इलाहाबाद में बंद रहे।
- रामनरेश 1988 में राज्यसभा सदस्य बने और 12 अप्रैल 1989 को राज्यसभा के अंदर डिप्टी लीडरशिप, पार्टी के महामंत्री और अन्य पदों से त्यागपत्र देकर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की सदस्यता ली।
- लखनऊ स्थित अंबेडकर यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनि‍वर्सिटी का दर्जा दिलाने में भी उनका अहम योगदान था।
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़‍िए, इसी साल रामनरेश की आई थी किताब...

पीजीअाई के डायरेक्‍टर डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि पूर्व सीएम रामनरेश दो महीने से ज्‍यादा समय से यहां एडमिट थे। पीजीअाई के डायरेक्‍टर डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि पूर्व सीएम रामनरेश दो महीने से ज्‍यादा समय से यहां एडमिट थे।
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इसी साल रामनरेश की आई थी किताब
- इसी साल अगस्‍त महीने में रामनरेश यादव की पहली किताब 'मेरी कहानी' सामने आई थी।
- इस किताब में उन्‍होंने कांग्रेस में आने, सीएम बनने और यूपी में उनके सीएम रहते समय हुए सांप्रदायिक दंगों को सुलझाने के घटनाक्रम के बारे में बताया था। 
- हालांकि, किताब में मप्र के गवर्नर रहते हुए उन्होंने अपने दामन पर आए व्यापमं के छींटों का कोई जिक्र नहीं किया था।
 
ऐसा था रामनरेश का कार्यकाल 
- 23 जून 1977 से 28 फरवरी 1979 तक यूपी के सीएम रहे।
- जून 2014 से 19 जुलाई 2014 तक छतीसगढ़ के गवर्नर रहे।
- 26 अगस्‍त 2011 से 7 सितंबर 2016 तक मध्‍य प्रदेश के गवर्नर रहे। 
 
पिछले साल बेटे की भी हुई थी मौत 
- बीते साल व्यापमं घोटाले में आरोपी रामनरेश यादव के बेटे शैलेष (52) की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। 
- पोस्टमॉर्टम करने वाली टीम ने उनकी मौत का कारण जहर बताया था। वहीं, परिवार का कहना था कि शैलेष को ब्रेन हेमरेज हुआ था। 
- बताया जाता है कि शैलेष इस बात से डरे थे कि उनकी प्रॉपर्टी कुर्क की जा सकती है।
- शैलेष को आरोपी बनाने के बाद एसटीएफ की टीमें डेढ़ महीने में तीन बार यूपी आई थीं। दो बार लखनऊ और एक बार आजमगढ़। 
- शैलेष के बड़े भाई कमलेश का कहना था कि शैलेष व्यापमं मामले में आरोपी बनाए जाने से मानसिक दबाव में थे। 
 
क्या है व्यापमं घोटाला? 
- व्यापमं घोटाला यानी मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल घोटाला है, जिसके पीछे कई नेता, सीनियर अफसर और बिजनेसमैन शामिल हैं। 
- व्‍यापमं प्रदेश में कई प्रवेश परीक्षाओं के संचालन के लिए जिम्मेदार राज्य सरकार द्वारा गठित एक सेल्‍फ फाइनेंस्‍ड और ऑटोनॉमस बॉडी है। 
- ये प्रवेश परीक्षाएं राज्य के एजुकेशनल इंस्‍टीट्यूशन्‍स में और सरकारी नौकरियों में एडमिशन के लिए ऑर्गनाइज की जाती हैं।
- इन प्रवेश परीक्षाओं में और नौकरियों में इनएलिजेबल कैंडिडेट्स की भर्तियों के लिए बिचैलियों के रूप में उच्च पदस्थ अधिकारियों और राजनेताओं की मिलीभगत से रिश्वत के लेन-देन और करप्‍शन के जरिए उन्‍हें प्रवेश दिया गया। इसमें बड़े पैमाने पर अयोग्य लोगों की भर्तियां की गईं। 
 
आगे की स्‍लाइड्स में देखिए, फोटोज...
कॉफिन में रखा पूर्व सीएम का शव। कॉफिन में रखा पूर्व सीएम का शव।
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गवर्नर राम नाईक भी पूर्व सीएम रामनरेश के आवास पर पहुंचे। गवर्नर राम नाईक भी पूर्व सीएम रामनरेश के आवास पर पहुंचे।
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अखिलेश यादव भी सांत्‍वना देने पहुंचे। अखिलेश यादव भी सांत्‍वना देने पहुंचे।
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सांत्वना देने पहुंचे सपा के मंत्री शारदा प्रताप शुक्ल। सांत्वना देने पहुंचे सपा के मंत्री शारदा प्रताप शुक्ल।
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पूर्व सीएम के घर पर पहुंचे लोग। पूर्व सीएम के घर पर पहुंचे लोग।
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रामनरेश के निधन की खबर के बाद मध्‍य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी दुख जताया (फाइल)। रामनरेश के निधन की खबर के बाद मध्‍य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी दुख जताया (फाइल)।
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रामनरेश यादव 23 जून 1977 से 28 फरवरी 1979 तक यूपी के सीएम रहे। (फाइल)रामनरेश यादव 23 जून 1977 से 28 फरवरी 1979 तक यूपी के सीएम रहे। (फाइल)
पीजीअाई के डायरेक्‍टर डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि पूर्व सीएम रामनरेश दो महीने से ज्‍यादा समय से यहां एडमिट थे।पीजीअाई के डायरेक्‍टर डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि पूर्व सीएम रामनरेश दो महीने से ज्‍यादा समय से यहां एडमिट थे।
कॉफिन में रखा पूर्व सीएम का शव।कॉफिन में रखा पूर्व सीएम का शव।
गवर्नर राम नाईक भी पूर्व सीएम रामनरेश के आवास पर पहुंचे।गवर्नर राम नाईक भी पूर्व सीएम रामनरेश के आवास पर पहुंचे।
अखिलेश यादव भी सांत्‍वना देने पहुंचे।अखिलेश यादव भी सांत्‍वना देने पहुंचे।
सांत्वना देने पहुंचे सपा के मंत्री शारदा प्रताप शुक्ल।सांत्वना देने पहुंचे सपा के मंत्री शारदा प्रताप शुक्ल।
पूर्व सीएम के घर पर पहुंचे लोग।पूर्व सीएम के घर पर पहुंचे लोग।
रामनरेश के निधन की खबर के बाद मध्‍य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी दुख जताया (फाइल)।रामनरेश के निधन की खबर के बाद मध्‍य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी दुख जताया (फाइल)।
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