फाइल फोटो: यूपीएसआईडीसी के चीफ इंजीनियर अरुण कुमार मिश्रा।
लखनऊ. नोएडा अथॉरिटी के अरबपति घोटालेबाज यादव सिंह को सोमवार को सस्पेंड कर उनपर विभागीय जांच बैठा दी गई है। वहीं, यूपी में अभी भी कई ऐसे यादव सिंह हैं जिन्होंने अरबों की अकूत संपत्ति बना रखी है और रसूख के चलते हर बार बच जाते हैं। इन्हीं में से एक यूपीएसआईडीसी (यूपी राज्य औद्योगिक विकास निगम) के चीफ इंजीनियर अरुण कुमार मिश्रा हैं। इन्होंने विभाग में रहते हुए अरबों की बेनामी संपत्ति बनाई। इस मामले में जांच भी बैठी, वह जेल भी गए और अब वापस अपने पद पर बहाल हो चुके हैं।
चीफ इंजिनियर अरुण कुमार मिश्रा के खिलाफ सीबीआई जांच, ईडी और एसआईटी जांच कर रही है। यूपीएसआईडीसी के दूसरे यादव सिंह अरुण कुमार मिश्रा घोटालों के चक्कर में जेल भी जा चुके हैं। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के अनुसार, अरुण कुमार मिश्रा 27 अप्रैल 2011 से 5 अक्टूबर 2011 तक जेल में भी रह चुके हैं।
नहीं हुआ था निलंबन
सूत्रों की माने तो यादव सिंह की तरह बड़े स्तर पर सांठ-गांठ के चलते चीफ इंजीनियर अरुण कुमार मिश्र बसपा सरकार में जेल गए थे। उस समय उनका निलंबन नहीं किया गया था। ऊंची पहुंच का असर यह रहा कि छह महीने जेल में गुजारने के बाद भी उनकी बहाली हो गई। यही नहीं अरुण कुमार मिश्रा के खिलाफ कोई विभागीय जांच भी नहीं कराई गई।
फर्जी मार्कशीट पर कर रहा है नौकरी
अगस्त 2014 में हाईकोर्ट की इलाहाबाद बेंच ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए अरुण कुमार मिश्रा की मार्कशीट को फर्जी करार दिया था। दरअसल, जांच में सामने आया था कि यूपीएसआईडीसी के चीफ इंजीनियर की 10वीं की मार्कशीट और डिग्री फर्जी है। दिलचस्प बात यह रही थी कि आरोपी इंजीनियर ने जब 28 साल की नौकरी कर ली, उसके बाद यह तथ्य सामने आया। हाई कोर्ट ने अरुण कुमार मिश्रा को सभी पदों पर नियुक्तियां रद्द करने के आदेश दिए थे। हालांकि, अरुण कुमार मिश्रा को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई थी।
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