यादव सिंह की फाइल फोटो।
लखनऊ. देश को सबसे ज्यादा पीएम देने वाले राज्य यूपी में हुए अहम घोटालों में 10 घोटाले एसे हैं जिसने न केवल राज्य सरकार की नींद हराम कर दी थी बल्कि देश में भी हलचल मच गई थी। ताजे घटनाक्रम में यादव सिंह का बेहिसाब संपत्ति के मामले को लेकर बवाल मचा हुआ है। इसी तरह स्मारक घोटाले, एनआरएचएम, मनेरगा, चीनी और ताज कॉरिडोर जैसे करीब 10 घोटालों को लेकर यूपी सुर्खियों में रहा। इन घोटालों में तकरीबन सभी पार्टियों के नेताओं के शामिल होने के आरोप हैं, लेकिन इनके मुख्य सूत्रधार गिरफ्त से दूर रहे।
बताते चलें कि इस साल के आखिरी महीने दिसंबर में यादव सिंह की बेहिसाब संपत्ति का खुलासा हुआ है। इन पर एक हजार करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति रखने का आरोप है। इस मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। मामले की जांच आयकर विभाग, एसआईटी और अन्य जांच एजेसियां कर रही हैं। पीएमओ की निगरानी में अब विशेष जांच दल (एसआईटी) उनके काले कारनामों की जांच करेगा। केंद्रीय प्रत्यक्षकर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर महानिदेशक (जांच) कृष्णा सैनी की अगुवाई में एसआईटी का गठन किया गया है। जांच रिपोर्ट ईडी को भेजी जाएगी।
कई मंत्रियों और आला अफसरों के नपने के आसार
यादव सिंह से जुड़े लोगों और उनकी बेहिसाब संपत्तियों को खंगाला जा रहा है। इस मामले में कई मंत्रियों, आला अधिकारियों और सफेद पोशों के नपने के आसार हैं। अब तक चुप्पी साधे रही अखिलेश सरकार ने यादव सिंह को निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। आयकर विभाग का एक दल मुंबई में भी यादव सिंह की कड़ी की तलाश कर रहा है, क्योंकि भाजपा के मुंबई के एक सांसद से संपर्क होने के बात सामने आई है। मुंबई में होटल कारोबार, कॉरपोरेट जगत और भवन निर्माण क्षेत्र में भी यादव सिंह के पैसे लगे होने की संभावना है।
काले कारोबार को छिपाने पत्नी को दिया था तलाक
दिलचस्प बात है कि बसपा सरकार के शासनकाल में यादव सिंह को शह मिली थी। बसपा सरकार में उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अकूत संपत्तियों का साम्राज्य स्थापित कर लिया। सपा सरकार में भी उसे शह मिली। यही नहीं, अपने काले कारोबार को छुपाने के लिए उसने पत्नी कुसुमलता से तलाक ले लिया था। इधर, चर्चा यह भी है कि यादव सिंह का परिवार अंग्रेजों के जमाने से दौलतमंद था। उनके गांववालों के अनुसार, यादव सिंह का परिवार शुरू से ही संपन्न था। आजादी से पहले जब देश में भुखमरी थी, उस समय उनके दादा बग्घी से चलते थे।
एक साल में एक हजार गुना बढ़ी गई संपत्ति
एक ही साल में यादव सिंह की बढ़ी एक हजार गुना संपत्ति उनकी पत्नी कुसुमलता और उनके अन्य परिजनों की कंपनियों के कुछ दस्तावेज से उजागर हुआ है। यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता 'चाहत टेक्नोलॉजी प्रा. लि.' कंपनी की डायरेक्टर है। इसका गठन मई 2007 में हुआ था। 2007-08 में कंपनी की कुल टर्नओवर 1856 रुपए थी। 31 मार्च 2008 को कंपनी का पेडअप कैपिटल सिर्फ 100 रुपए था। अब इन मामूली आंकड़ों में ही रसूख और तिकड़म का ऐसा तड़का लगा कि एक साल में 31 मार्च 2009 को कंपनी का पेड अप कैपिटल बढ़कर एक लाख हो गया। कंपनी की नेट फिक्सड एसेट बढ़कर 5 करोड़, 47 लाख, 81 हजार, 832 रुपए हो गई।
आगे पढ़िए अब तक पता नहीं चला इन घोटालों के मास्टर माइंड का…