फोटो: मेरठ में बाजार बंद होने से सड़कों पर पसरा सन्नाटा।
लखनऊ. व्यापारी नेता और पूर्व सांसद बनवारी लाल कंछल पर हमले के विरोध में प्रदेशभर के व्यापारी लामबंद हो गए हैं। यूपी के व्यापारियों ने गुरुवार को व्यापार और बाजार बंद रखने का ऐलान किया। सूबे के सभी व्यापारी संगठनों ने इसका समर्थन किया। बंद के दौरान लखनऊ के साथ ही अन्य जिलों के व्यापारी आरोपी वकीलों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जुलूस निकाला। साथ ही डीएम को सीएम के नाम का एक ज्ञापन भी सौंपा।
साप्ताहिक बंदी और व्यापारिक संगठनो की बंदी की घोषणा के बावजूद शहर के कई व्यापारियों ने अपनी दुकानें खोल दी। व्यापारी 8 दिसंबर को कराई गई आंशिक बंदी में जबरन दुकाने बंद कराने से नाराज़ हैं। साथ ही कई व्यापारी बंदी को लेकर राजनीति से भी खफा दिखे।
अमीनाबाद की दुकानें बंद रही
व्यापारी नेता बनवारी लाल कंछल के गढ़ लखनऊ में ही बंदी का व्यापक असर नहीं दिखा। यहियागंज, पाण्डेय गंज, कुण्डरी रकाबगंज, दुगावां, गणेशगंज जैसी थोक मंडियां तो हर गुरूवार की ही तरह 11 को बंद रही। हालांकि, कंछल के गढ़ अमीनाबाद में ही व्यापारियों ने गुरुवार की साप्ताहिक बंदी और प्रदेश बंद के ऐलान के बावजूद दुकानें खोली रखी।
खुले रहे बाजार
अमीनाबाद के व्यापारी कुंवर कैलाश ने कहा कि एक तरफ हमारी बंदी का क्रेडिट लेने की राजनीति हो रही है। वहीं आए दिन दुकानदारों पर बंदी में शामिल होने के लिए दबाव बनाया गया। दोनों ही सूरत में नुकसान व्यापारी का ही हो रहा है। इसके अलावा महानगर, कपूरथला, इंदिरा नगर, भूतनाथ, के अलावा अमीनाबाद की रिफ्यूजी मार्केट और प्रताप मार्केट खुले रहे।
साप्ताहिक बंदी का दिखा असर
व्यापारिक संगठन भले ही बंदी को अभूतपूर्व बताकर श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है। कई व्यापारियों ने पिटाई को तो गलत बताया, लेकिन बंदी को लेकर वह अस्पष्ट दिखे। अमीनाबाद के व्यापारी अनुराग मालवीया ने बताया कि हर गुरुवार को बाज़ार बंद रहता है। ऐसे में बंदी का असर है या साप्ताहिक बंदी का ये पता करना मुश्किल है। गणेशगंज के कपड़ा व्यापारी वरुण गुप्ता ने कहा कि व्यापारिक संगठनों की आपसी राजनीति की वजह से ही व्यापारियों का उत्पीड़न बढ़ रहा है। बंदी को लेकर भी राजनीति हो रही है। इसी वजह से बंदी का असर भी नहीं दिख रहा।
आगे जानिए, किन संगठनों ने किया यूपी बंद का समर्थन...