प्रतीकात्मक तस्वीर।
लखनऊ. यूपी में बने चेकडैम की गुणवत्ता को लेकर सरकार के दो मंत्री आमने-सामने आ गए हैं। यह मामला दो कैबिनेट मंत्रियों के बीच का है। यूपी के प्राविधिक शिक्षा मंत्री शिवाकांत ओझा ने अपनी ही सरकार द्वारा बनवाए गए चेकडैम को खराब गुणवत्ता का करार देते हुए बीते दिनों मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामले की जांच करवाने के लिए कहा था। इस पर लघु सिंचाई मंत्री राजकिशोर भी अब खुलकर सामने आ गए हैं।
मंत्री शिवाकांत ओझा के शिकायत पर लघु सिंचाई मंत्री राजकिशोर सिंह का कहना है कि जब से मैंने लघु सिंचाई विभाग का काम संभाला है, तब से मेरी यही कोशिश रही है कि हर निर्माण गुणवत्तापूर्वक हो। ऐसे में आरोप लगाया जा रहा है कि 500 करोड़ के चेकडैम निर्माण में घोटाला हुआ है। मेरे कार्यकाल में अभी तक सिर्फ 183 करोड़ रुपए ही चेकडैम निर्माण पर खर्च किए गए हैं।
लघु सिंचाई मंत्री राजकिशोर सिंह का यह भी कहना है कि मैंने इस मामले में स्वयं जांच के आदेश दे दिए हैं। इसके साथ ही जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि आप एसडीएम स्तर के अधिकारी से जिले में जांच करवाएं। वे कहते हैं कि अब तक इलाहाबाद में 56 करोड़ का टेंडर किया गया है जबकि आरोप लगाने वाले कह रहे हैं कि हजारों करोड़ रुपए का घोटाला हो गया है। ऐसा कतई संभव नहीं हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि मैंने अपनी पार्टी के सभी प्रतिनिधियों से कह रखा है कि कभी भी कोई मेरे विभाग से दिक्कत हो तो मुझे तुरंत संपर्क करें।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, बीते दिनों प्राविधिक शिक्षामंत्री शिवाकांत ओझा ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शिकायत की है कि 500 चेकडैम के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता ठीक नहीं है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि लघु सिंचाई विभाग द्वारा दो साल के भीतर प्रतापगढ़ में 200 करोड़ रुपए की लागत से 148 घटिया चेकडैमों का निर्माण कराया गया है। इसकी उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए।
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