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सुनो...सुनो...नाक नीचे से फर्जीवाड़े की शिकार हो रहे हैं 'सरकार'

9 वर्ष पहले
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लखनऊ. विशेष सचिव के फर्जी हस्‍ताक्षर से गरीब महिलाओं में वृद्धों के लिए साड़ी और कंबल बांटने का करोड़ों रुपए का ठेका देने का मामला प्रकाश में आया है। मामले में विशेष सचिव की तरफ से लखनऊ के हजरतगंज थाने में अज्ञात व्‍यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है। वैसे सरकार के नाम पर फर्जीवाड़ा करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कहीं कोई मुख्‍यमंत्री का ओएसडी बनकर अधिकारियों से ट्रांसफर का दबाव बनाता पकड़ा गया, तो कोई फर्जी आईएएस बनकर सीधे मुख्‍यमंत्री के सचिवालय में ही पहुंच गया। और तो और प्रदेश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली यूपी विधानसभा के गलियारों में भी एक फर्जी महिला विधायक गिरफ्तार की जा चुकी है।
पिछले साल नवंबर में सीएम सचिवालय के पंचम तल की सुरक्षा को दांव देते हुए प्रमोद नाम का युवक प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री राकेश गर्ग से मिलने पहुंच गया। उसने खुद को आईएएस सौरभ गर्ग बताया और दिल्ली में संयुक्त सचिव वित्त के पद पर तैनात होने की बात कही। सचिवालय से पास मिलने के बाद वह पंचम तल पर बने मुख्यमंत्री सचिव राकेश गर्ग से मिलने पहुंचा। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री सचिव को उस पर शक हुआ। उन्होंने जब सौरभ गर्ग से कई अन्य विभागों के बारे में पूछना शुरू किया तो वह हड़बड़ा गया और उसकी पोल खुल गई। मुख्यमंत्री सचिव ने उसको सचिवालय सुरक्षा कर्मियों के हवाले कर दिया। सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुंच गयी। पुलिस आरोपी को कोतवाली ले आयी और वहां उससे कड़ाई से पूछताछ हुई। आरोपी ने बताया कि उसका असली नाम प्रमोद कुमार सिंह है, वह गाजियाबाद का रहने वाला है।
प्रमोद मौजूदा समय में नोएडा में एक साफ्टवेयर कम्पनी में इंजीनियर है। वह मूल रूप से जौनपुर का रहने वाला है और बीएचयू से उसने एमटेक किया है। छानबीन में पुलिस को इस बात का भी पता चला कि आरोपी प्रमोद किसी एआरटीओ मयंक भारती के ट्रांसफर के सिलसिले में मुख्यमंत्री सचिव से मिलने के लिए आया था। एक माह से वह सचिवालय में तैनात कई अधिकारियों से फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर बातचीत कर रहा था। इसी साल जनवरी में उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ लिमिटेड के एमडी रविप्रकाश अरोड़ा को फोन आया। उधर से आवाज आई कि मैं सीएम का ओएसडी
गजेंद्र सिंह बोल रहा हूं। देखिए कायमगंज चीनी मिल के प्रभारी सुरक्षा अधिकारी का मामला प्रकाश में आया है। उनका प्रमोशन काफी समय से लंबित है।
किसी भी कीमत पर जल्‍द ही उनका प्रमोशन हो जाना चाहिए।
इसके बाद एमडी ने गजेंद्र सिंह से मुलाकात की तो पता चला कि गजेंद्र ने उन्‍हें कोई फोन नहीं किया। जानकारी होने पर गजेंद्र सिंह ने भी उस नंबर पर फोन किया तो शख्‍स ने उन्‍हें भी बताया कि वह सीएम के ओएसडी गजेंद्र सिंह हैं। आखिरकार मामले में हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर लिखवाई गई। यही नहीं उस युवक का फोन नंबर सर्विलांस पर लगा दिया गया। जिसके सहारे लखनऊ पुलिस ने फर्रुखाबाद के कायमगंज में रहने वाले हिमांशु उपाध्‍याय को गिरफ्तार किया। पकड़ में आते ही हिमांशु कहने लगा कि साहब मैंने अपने पापा के प्रमोशन के लिए कई नेताओं और अफसरों से गुहार लगाई जब किसी ने नहीं सुनी तो मैंने सीएम के ओएसडी बनकर एमडी साहब को फोन कर दिया। पुलिस के अनुसार हिमांशु ने कबूला कि वह कई बार मुख्यमंत्री आवास जा चुका है, उसे सीएम के पीएस-2 का नाम मालूम था। अधिकारियों से बातचीत के लहजे को बारीकी से देखा और खुद को पीएस-2 बताकर फोन करने लगा। इससे पहले उसने इसी तरह रणवीर सिंह के पास से पैनकुली विभाग का सुरक्षा चार्ज हटवाया।
यही नहीं उसने चीनी मिल में सिविल इंजीनियर एपी सिंह पर मिल की जमीन बेचने का आरोप लगाकर उनके पास से सुरक्षा अधिकारी का अतिरिक्त चार्ज हटवाया। इस संबंध में रईस यादव की ई-मेल आईडी से एमडी को जमीन के फोटो व अन्य सूचनाएं भेजीं। इससे पहले मई में एक महिला फर्जी विधायक बनकर उत्तर प्रदेश की विधान सभा में बजट सत्र के दौरान पहुंच गई। बाद में विधानसभा सुरक्षा में तैनात अधिकारियों और पुलिस वालो ने उसे गिरफ्तार कर लिया। मई में बजट सत्र की शुरुआत हुई तो विधानसभा भवन के सात नंबर गेट से एक टाटा मांजा गाड़ी ( यूपी 32 डी डब्लू 9488) अन्दर गई, जिसे वहां तैनात सुरक्षा कर्मियों ने रोका और पूछताछ की तो गाड़ी में बैठी महिला ने अपने को कानपुर का विधायक बताते हुए गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को अदब में ले लिया। महिला जिस गाड़ी में सवार थी उस पर विधान सभा कार्यालय से जारी पास नहीं लगा था, फिर भी महिला द्वारा अपने को विधायक बताने पर सुरक्षा कर्मियों ने उसे जाने दिया।