लखनऊ. हाईकोर्ट ने लखनऊ के जिलाधिकारी की मनमानी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने वीआईपी मूवमेंट वाले रास्ते के पास पड़ने वाले पेट्रोल पंप को सीज नहीं करने का आदेश देते हुए कहा कि मंत्री और जज के मूवमेंट से व्यापार बंद नहीं हो सकता। हर व्यक्ति को व्यापार करने का हक है।
जानकारी के मुताबिक, अमौसी से एअरपोर्ट जाने वाले रास्ते में पड़ने वाले पेट्रोल पंप को 29 जुलाई 2003 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने सीज करने का आदेश दे दिया था। जबकि इसी पेट्रोल पंप को इसी साल 31 मार्च को एनओसी दी गई थी। इसके बाद ही हिन्दुस्तान पेट्रोलियम ने उसे चलाने के लिए लाइसेंस दिया था।
याचिकाकर्ता की ओर से वकील मनीष कुमार का कहना था कि पेट्रोल पंप सीज करने से पहले जिलाधिकारी ने कोई नोटिस भी नहीं दी थी। इसे केवल इस लिए सीज कर दिया गया, क्योंकि पेट्रोल पंप के रास्ते से ही वीआईपी मूवमेंट होता है। याचिकाकर्ता की दलील थी कि इसकी वजह से उसने अपना पेट्रोल पंप सड़क से कुछ और पीछे कर लिया था।
वीआईपी मूवमेंट का मतलब यह नहीं कि कारोबार बंद कर दिए जाएं
जस्टिस डीपी सिंह और जस्टिस एके त्रिपाठी की बेंच ने मेसर्स शक्ति फिलिंग स्टेशन की ओर से दायर रिट याचिका स्वीकार करते हुए सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि वीआईपी मूवमेंट का मतलब यह नहीं कि रास्ते में पड़ने वाले सभी व्यापार ही बंद कर दिए जाए। कोर्ट ने कहा मंत्री, जज या कोई भी वीआईपी क्यों ना हो उसके लिए प्रशासन द्वारा ऐसा करना ठीक नहीं है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि इसकी वजह से पेट्रोल पंप को बंद नहीं किया जा सकता कि उधर से मंत्रियों और जजों के काफिले गुजरते हैं और पंप की वजह से दिक्कत होती है। कोर्ट ने कहा यदि पंप से वीआईपी मूवमेंट के दौरान कोई असुविधा होती है, तो उसके लिए समुचित सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम किया जाना चाहिए। कोर्ट ने आगे कहा कि संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत सभी को निर्बाध रूप से व्यापार करने का हक है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच (तस्वीर में)